सुनी सुनाई बातें... - तर्कशील भारत

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Thursday, September 16, 2021

सुनी सुनाई बातें...

 अल्लाह ने 

जिब्रील से कहा

जिब्रील ने

हजरत से कहा

हजरत ने

खदीजा से कहा

खदीजा ने

अपने भाई से कहा

भाई 

इसी पल के इंतजार में था

उसने बहन से कहा

खदीजा तेरी बातें

मुझे कबूल हैं

तेरा पति ही

आखिरी रसूल है


इनमे से सभी ने

सुनी सुनाई बातों पर

यकीन किया और

नबी की बकी गई

हर झूठी बात को

तस्लीम किया 


किसी ने भी 

सुनी सुनाई बातों पर

कोई सवाल नहीं किया

और जब तक

सुनने वाले कम थे

तब तक

हजरत साहब ने भी

कोई बवाल नहीं किया 


इस तरह

सवाल करने वालों का दायरा

घटता चला गया

और 

सुनने वाले लोगो के जरिये

हजरत साहब का कुनबा 

बढ़ता चला गया 


धीरे धीरे

सुनने वाले

औरों को भी

सुनाने लगे

और इन 

सुनी सुनाई बातों को

दूर दूर तक पहुंचाने लगे


झूठी बातों को मनवाने की खातिर

बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं 

एक झूठ को छुपाने के लिए 

सौ झूठ और बोलने पड़ते हैं


बकने वाले बकते चले गए

सुनने वाले सुनते चले गए

हवाई फलसफों की बुनियाद पर

मजहब के अफ़साने गढ़ते चले गए


आसमान के 

सात दरवाजे खोले गए

झूठ पर झूठ बोले गए


झूठ इतना बढ़ा की

एक किताब तैयार हो गई

और इस किताब को सच मानकर

अक्सरियत बीमार हो गई


भूखे लोग रोटी को तरस रहे थे

भरे पेट 

सुनी सुनाई बातों की खातिर 

लड़ रहे थे 


नफरतों के साये में

तलवारें चमक रही थीं


जहां बादलों से पानी की

जरूरत थी

वहां 

आसमान से

आयतें टपक रही थीं 


जहालत की कोख से 

रूह जिन्न और 

और फ़रिश्ते पैदा होने लगे 


जहां जमीन पर

फसलों की जरूरत थी

वहां दिलों में

फासले पैदा होने लगे


शैतान का काम 

इंसान कर रहा था

और रब्बुलआलमीन ऊपर बैठा

लोगों को उकसा रहा था


सुनी सुनाई बातों में आकर

लोग अपने ही सगे संबंधियों से 

लड़ रहे थे

और 

उनकी मदद के लिये

आसमान से फ़रिश्ते उतर रहे थे


फरिश्तों की बात भी

हवा हवाई थी 

जिसे नबी ने 

बड़ी चालाकी से

लोगों में फैलाई थी


गुरु ने बका

चमचों ने सुना

और 

सुन सुन कर सब

सुन्नी हो गये 


जो बचे

वो शिया हो गए


इस तरह सब

मियां हो गए


सुनी सुनाई बातों पर ही

क्राइस्ट को लटकाया गया

बाइबिल की बकवासों में

दुनिया को भरमाया गया


सुनी सुनाई बातों पर

घण्टियाँ बजती रहीं

धर्म के धंधेबाजों की

दुकानें सजती गईं 

सुनी सुनाई बातों पर

ऋचाएं रचती गईं 

वेदों की बकवासों पर

मूर्खता चलती रही


सत्य प्रेम और 

परिवर्तन के साथ ही 

समाज आगे बढ़ता है

सुनी सुनाई बातों पर

धर्म का धंधा चलता है


शरीर सत्य है

लेकिन

इस शरीर मे

रूह होती है

यह सुनी सुनाई बातें है

मृत्यु सत्य है

लेकिन मृत्यु के बाद 

भी जीवन है 

यह सुनी सुनाई बातें है

जीवन सत्य है

लेकिन यह जीवन 

किसी खुदा की देन है

यह सुनी सुनाई बातें है

सृष्टि चल रही है

यह सत्य है

लेकिन सृष्टि को कोई

अल्लाह चला रहा है

यह सुनी सुनाई बातें है


धर्मयुद्ध या 

जिहाद मत करो

मजहबों के नाम पर

खूनी विवाद मत करो

झूठे हैं मजहबों के अफ़साने 

सुनी सुनाई बातों पर

जिंदगी बर्बाद मत करो 


इंसानियत पर छाई 

यह कैसी महामारी है

सुनी सुनाई बातों पर 

जंगे अभी जारी है


कल फिर मरा था कोई 

देखो तो आज किसकी बारी है


झूठ फरेब और मक्कारी 

सच्चाई पर सब भारी है


ढूंढा है मंगल पर जीवन 

यह किसने बाजी मारी है


सूखी धरती खफा आसमां 

कुछ गलती हमारी है 


कट गया जीवन फेक न्यूज़ में 

अब मरने की तैयारी है


डर की बाजी भय का सौदा 

नफरत की चिंगारी है


लूट का बिजनेस झूठ का धंधा 

यह कैसी बीमारी है


इंसानियत पर छाई 

यह कैसी महामारी है

सुनी सुनाई बातों पर 

जंगे अभी जारी है


-शकील प्रेम

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