बैल - तर्कशील भारत

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Monday, August 9, 2021

बैल

 भोजन 

सुरक्षा और प्रजजन 

की क्षमता के अलावा

प्रकृति ने 

सभी जीवों को 

कोई न कोई 

विशिष्टता प्रदान की है

किसी को जहर दिया

तो किसी को अमृत

किसी को 

मोटी खाल दी

तो किसी को 

तेज चाल दी

चीते को गति दी

तो 

होमोसेपियंस को मति दी


हिरण छोटी थी

उसे रफ्तार दे दिया

हाथी को 

कोई हथियार नहीं मिला 

तो उसे आकार दे दिया


लेकिन

नेचर के इस सिलेक्शन में

बैल को क्या मिला ?

मनुष्य ने 

अपनी बुद्धि की ताकत का

नाजायज इस्तेमाल करते 

एक जीव से 

प्रजजन का 

वह गुण भी छीन लिया

जो जीवन का आधार होता है


बैल 

प्राकृतिक जीव नहीं है

इसे 

इंसानों ने गढ़ा है

या यूं कहें कि

मनुष्य ने

अपने स्वार्थों की खातिर 

एक जीव के

नैसर्गिक गुण की हत्या कर

उसे बैल बनाया है


बचपन में ही

उसके अंडकोषों को

बेरहमी से 

कूंच दिया जाता है

तब जाकर

यही जीव 

बैल बनता है

और बाकी की आयु

मनुष्य के स्वार्थों में जुतकर 

पूरी करता है


जो बैल नहीं बन पाते

वो साढ़ बनते हैं 

और 

किसी बूचड़खाने में

खाल खिंचवाने के बाद

मनुष्य के पेट की खातिर

वीरगति को प्राप्त होते हैं


इंसानी लालच के 

सिलेक्शन द्वारा

हजारों में से

किसी एक 

साढ़ को चुना जाता है

ताकि वह

मादाओं तक

शुक्राणु पहुंचाये और

प्रजनन का खेल 

निर्बाध चल सके...


प्रकृति 

बैल पैदा नहीं करती

अपनी बुद्धि का 

दुरुपयोग करते हुए 

मनुष्य

बैल को बैल बनाता है....


-शकील प्रेम

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