धर्मों की फिलॉसफी - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Sunday, August 22, 2021

धर्मों की फिलॉसफी

 धर्मों की फिलॉसफी

इंसान की साइकोलॉजी 

को बिगाड़ कर

उसे हैवान बना देती है

जो आदमी 

धर्म के जितना करीब जाता है

उसके अंदर का इंसान

उतना ही कमजोर होता जाता है

फिर यही कमजोर इंसान

धर्म के ओवरडोज़ से

जॉम्बी बन जाता है

या बना दिया जाता है...


समस्या उस वृक्ष में है

जिसे मजहब कहते हैं

तालिबान या अलकायदा तो 

उस वृक्ष से निकले हुए फल है

बीज ही जहरीला हो 

तो फल मीठा कहाँ से मिलेगा ?

बबूल का पौधा

आम कहाँ से देगा ?


शांति का 

कोई मजहब नहीं है

न कभी था 

शांति वाला धर्म 

भ्रम के सिवा कुछ नहीं...


-शकील प्रेम






No comments:

Post a Comment

Pages