चंपारण को क्या चाहिए ? - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Tuesday, July 27, 2021

चंपारण को क्या चाहिए ?

 चंपारण को क्या चाहिए ?

आज चंपारण के कुछ युवा हैशटैग चला रहे है "चंपारण मांगे एयरपोर्ट" मैं भी चंपारण का हूँ लेकिन मुझे गर्व है कि मैं इस बेगैरत सोच का हिस्सा नहीं हूँ.

पूरे चंपारण में अमीरों के कई हाईटेक हॉस्पिटल हैं लेकिन गरीबों के लिए एक भी ढंग का सरकारी हॉस्पिटल नहीं है पैसे के अभाव में मरीज दम तोड़ देते हैं या फिर उन्हें पटना दिल्ली भागना पड़ता है इसी चंपारण में गरीब के बच्चों के लिए एक भी ढंग की यूनिवर्सिटी नहीं है जहां से पढ़कर किसान का बच्चा भी इंजीनियर डॉक्टर बन सके सरकारी स्कूलों में खिचड़ी शिक्षा प्राप्त कर जो प्रोडक्ट निकलते हैं वो दिल्ली गुजरात के दिहाड़ी मजदूर बनते हैं.

सबसे ज्यादा बेरोजगारी भी इसी क्षेत्र में है जहां 3 बड़ी चीनी मिलें (जो हजारों को नौकरी दे सकती थी ) वर्षों से बंद पड़ी हैं हर साल बाढ़ में यहां की बड़ी आबादी घर का चूल्हा तक नहीं जला पाती लेकिन कुछ लोग ऐसे भी बेगैरत लोग है जिन्हें चंपारण की इस बदकिस्मती से कोई मतलब नहीं.

इन खाये पिये अघाये लोगों को न तो सरकारी अस्पतालों की जरूरत है न बेहतर यूनिवर्सिटी की और न ही बाढ़ की समस्या से निजात का कोई ठोस उपाय चाहिए बल्कि इन्हें एयरपोर्ट चाहिए जहां से पूरी दुनिया मे भ्रमण किया जा सके. 

ये वो लोग हैं जो ट्रेन की ए.सी. बोगी में रिजर्व्ड सीट पर बैठ कर देश की इकोनॉमी पर चर्चा करते हैं ये वही लोग हैं जो कहते हैं जातिवाद खत्म हो चुका है ये वही लोग है जिन्हें देश मे कहीं गरीबी नहीं दिखती ये वही लोग हैं जिन्होंने कभी जनरल डिब्बा नही देखा.

जबतक देश के आखिरी आदमी तक पंखा न पहुंचे तब तक ए. सी. की बात करने वाला भी अपराधी है क्योंकि भगत सिंह ने कहा था जब तक एक आदमी भी भूखा है तब तक हम सब अपराधी हैं क्योंकि हम खा रहे हैं.

एयरपोर्ट जरूरी है लेकिन उससे पहले हमें यह तय करना होगा कि चंपारण के आखिरी आदमी तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकें. 


-शकील प्रेम

No comments:

Post a Comment

Pages