धर्म और विज्ञान - तर्कशील भारत

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Monday, July 5, 2021

धर्म और विज्ञान

 खेती की शुरुआत के समय ही

जब मानव को 

भोजन सुरक्षा और प्रजजन से 

थोड़ी फुर्सत मिली 

शरीर को आराम मिला

और दिमाग को काम मिला 

तब ही

चेतना के चिंतन से

जिज्ञासाओं के 

प्रसव काल का समय आया

और मानव ने

प्रकृति को 

समझना शुरू कर दिया

तब से लेकर

अब तक

मनुष्य की छोटी सी समझ

कुदरत के रहस्यों को

जितना भी समझ पाई 

वो  

"विज्ञान" बन गया

और मानव की अबोध बुद्धि 

जो न समझ पाई वो 

"धर्म" बन गया 


-शकील प्रेम


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