मजहब को गंवारा नहीं हंसना भी... - तर्कशील भारत

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Thursday, July 29, 2021

मजहब को गंवारा नहीं हंसना भी...

फर्जी कहानियों में जुनून ढूंढते हो

फूलों के रस में तुम खून ढूंढते हो

मजहब को गंवारा नहीं हंसना भी

और तुम मजहब में सुकून ढूंढते हो 

-शकील प्रेम



 

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