जिंदगी क्या है ? - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Wednesday, July 28, 2021

जिंदगी क्या है ?

 जिंदगी क्या है

एक संयोग

एक मौका 

एक ऋण

या एक 

प्राकृतिक दुर्घटना 


खरबों शुक्राणुओं की 

की उस यात्रा पर गौर करें

जिसमे से कोई एक शुक्राणु ही

डिम्ब तक पहुंचने में 

कामयाब हुआ था 

इसके बाद कि यात्रा 

और भी अद्भुत है

जरा सोचिए कि

शुक्राणु से भ्रूण बनने तक

भ्रूण से शिशु बनने तक

शिशु से बालक

बालक से किशोर

और किशोर से युवा होने तक कि

हमारी यात्रा

कितनी दुविधाओं से गुजर कर पूरी हुई है

सच तो यह है कि

एक कोशिका से 

अनन्त कोशिकाओं का

यह

अविश्वसनीय सफर 

मात्र एक 

प्राकृतिक संयोग भर ही होता है


जिस दिन हम इस सफर को 

समझ जाते है 

उसी दिन से 

जीवन की यह अदभुत यात्रा

एक मौका बन जाती है


इस मौके के साथ ही

हमे यहां तक पहुंचाने में

प्रकृति परिवार और 

परिवेश की अहम भूमिका होती है

इस तरह 

जिंदगी का यह सफर

दूसरों का उपकार बन जाता है

और हम ऋणी हो जाते हैं


जिंदगी के आखिरी क्षणों तक

प्रकृति परिवार और परिवेश का 

यह ऋण हमे चुकाना होता है

यदि कर्ज चुकाए बिना हम

समाप्त हो जाते हैं 

तो हमारी जिंदगी 

इस धरती के लिए

एक नेचुरल डिजास्टर ही साबित होती है 


दो जिंदगियों के

कुदरती मिलन के नतीजे में

शुरु होती है 

तीसरी जिंदगी

चेतना और विचार मिलकर

इस मामूली जिंदगी 

के इर्द गिर्द

गढ़ते हैं मनोविज्ञान 

जिससे तैयार होता है

एक इंसान


परिवार और परिवेश

से उपजी 

सही या गलत 

जानकारियों पर 

आधारित 

मनोविज्ञान ही

व्यक्ति के

व्यक्तित्व का निर्माण करता है


व्यक्ति चित्रकारी करे

या बलात्कारी बने

यह

परिवार और परिवेश से बने

व्यक्ति के मनोविज्ञान पर ही 

निर्भर करता है


आदमी 

अपनी जिंदगी को कैसे देखता है

यह उसकी 

इसी साइकोलॉजी पर ही निर्भर होती है


अब सोचिये की जीवन के बारे में

आपकी साइकोलॉजी क्या है ?


आप रिश्तों के साथ जीना चाहते हैं 

आप दौलत के ढेर पर बैठना चाहते हैं

आप सत्ता के शिर्ष तक पहुंचना चाहते हैं

या आप सब कुछ पाना चाहते हैं 

क्या आपके लिए 

जीवन का उद्देश्य यही है ?


यदि जीवन का यही उद्देश्य है

तो क्षमा कीजियेगा 

आपका जन्म 

सामाजिक प्राणी के रूप में होना

यह एक नेचुरल डिजास्टर से ज्यादा 

और कुछ नहीं


ऊंचे ख्वाब देखना या

महत्वाकांक्षी होना

इंसानी फितरत है 

यह पार्ट ऑफ एवोल्यूशन है

इसमें कोई बुराई नहीं

लेकिन सम्वेदनाओं से परे होना

यह इंसानी फितरत नहीं 

हमदर्दी के बिना हम 

कीड़े मकोड़े से भी 

एक पायदान नीचे गिर जाते हैं


जहां एक ओर 

करोड़ों बच्चे भूख से तड़पते हो

लाखों फुटपाथों पर सड़ते हों

हजारों बेमौत मरते हों

सैंकड़ों जुल्म सहते हों


करोड़ों इंसानों की इस पीड़ा से

खुद को अलग कर 

किस रिश्ते की बात करते हैं आप ?


लाखों के मुंह से निवाला छीन कर

दौलत का ढेर लगा भी दें 

तो उससे हासिल क्या होगा ?


मजलूमों की लाशों पर

सियासत की ऊंचाइयों को छू भी लें 

तो आपकी जिंदगी और 

गुबरैले की जिंदगी में अंतर क्या रह जायेगा ?


खुद के लिए 

सब कुछ पा लेने की चाहत में

दूसरों का बहुत कुछ तबाह कर 

आप क्या जीत लेना चाहते हैं ?


भोजन सुरक्षा और प्रजजन के लिए संघर्ष 

यही जीवन का आधार है 

पशुओं की

जिंदगी के मायने बस 

इन्ही तीन प्राकृतिक 

आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही होते है 

एक इंसान के लिए 

भोजन सुरक्षा 

और प्रजजन के लिए संघर्ष ही

जीवन नहीं है 

मनुष्य जीवन का उद्देश्य 

इससे थोड़ा तो ऊपर होना ही चाहिए


मेरी नजर में 

इंसानी जिंदगी 

संघर्षों की बुनियाद पर खड़ी 

वो इमारत है 

जिसके चार पिलर हैं 

प्रेम 

जुनून  

सम्वेदना और जिज्ञासा.


मैं समझता हूँ कि

जिसके जीवन के 

यह चार पिलर कमजोर हैं

उसकी जिंदगी 

जिंदगी नहीं बल्कि एक

नेचुरल डिजास्टर ही है


-शकील प्रेम





No comments:

Post a Comment

Pages