अल्लाह के सदके में बकरे की कुर्बानी - तर्कशील भारत

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Monday, July 26, 2021

अल्लाह के सदके में बकरे की कुर्बानी

 रीत जहालत की, है सदियों पुरानी 

अल्लाह के सदके में बकरे की कुर्बानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


हाथ मे ख़ंजर लिए कई यजीद होते हैं 

मजहबों की खातिर बेजुबा शहीद होते हैं

गर्दन उड़ाई जाती है इस रस्में खुदाई में 

लाशों के मैदां में कातिल मजीद होते हैं 

कैसी है ये जिद कैसी है नादानी

नालों में लहू और रगों में है पानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


जुबां पर रहमत की बातें दिल मे हलाकू है

खुदा के नाम पर देखो हर हाथ में चाकू है

मजहब के धंधे में, है लूट और मक्कारी

कर्म लुटेरों का यहां हर कोई डाकू है

न शर्म है चेहरे पर न कोई परेशानी

गर्दन जुदा कर की बकरे पे मेहरबानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


कैसा ये मंजर है हर हाथ मे ख़ंजर है 

इस्लाम की कश्ती है लहु का समंदर है

खून से पूरी होती है मंशा खुदाओं की

इंसान बनेगा क्या ये तो अभी बन्दर है

देवी को बलि अल्लाह को कुर्बानी

मजहब के नाम पर यह कैसी हैवानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


नाम खुदा का है बन्दे की शरारत है 

सर तन से जुदाई की यह कैसी नजाकत है

गोश्त के टुकड़ों पर यह कैसी सदाक़त है 

खुदा तेरे बन्दों की यह कैसी इबादत है

नापाक इरादों की है बात ये क़ुरआनी

हदीसों की बदबू में ये रश्म है शैतानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


रीत जहालत की, है सदियों पुरानी 

अल्लाह के सदके में बकरे की कुर्बानी

बेहूदा रस्मों का है ये फर्जीवाड़ा

नकली मजहब की, झूठी है कहानी 


-शकील प्रेम

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