मुझे "महान" बनने का शौक नहीं है - तर्कशील भारत

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Monday, July 12, 2021

मुझे "महान" बनने का शौक नहीं है

 मुझे "महान" बनने का 

शौक नहीं है

मैं जो भी करता हूँ 

इसलिए करता हूँ 

ताकि खुद को 

जिंदा कह सकूँ

और बेहया जमाने के बीच

खुद को शर्मिंदा कह सकूँ


मैं जो लिखता हूँ

वह मेरी 

भड़ास भर होती है

मैं जो भी बकता हूँ

वह बेशक मेरी

बकवास भर होती है


मैंने अभी तक

जो कुछ भी किया है

खुद की खुशी के लिए किया है


मैंने अभी तक

जो कुछ भी लिखा है

स्वयं की संतुष्टि के लिए लिखा है


मैंने अब तक 

जो कुछ भी बका है

खुद को बहलाने के लिए बका है


यह सब मैं क्यों करता हूँ

मुझे नहीं मालूम ?


लेकिन...


मुझे दुख होता है

जब मैं 

किसी मासूम को

सड़कों पर

भटकते देखता हूँ


फिर 

अपने इस दुख को 

कम करने की खातिर

मैं बेचैन हो जाता हूँ


मेरी इस बेचैनी का 

स्थाई समाधान क्या है ?

मुझे नहीं मालूम


मुझे गुस्सा आता है

जब मैं 

मजहब की आड़ में

इंसान को जानवर बनते देखता हूँ


फिर मैं

अपने इस गुस्से को 

जाहिर करने की खातिर

मजहब की असलियत पर 

दो शब्द लिख लेता हूँ


मैं इस गुस्से से कैसे निजात पाऊं ?

मुझे नहीं मालूम


मैं शर्म से पानी पानी हो जाता हूँ

जब मैं

किसी मासूम बच्ची से

बालात्कार की खबर पड़ता हूँ


फिर मैं 

ऐसी हैवानियत पर भी

लिख कर अपनी शर्म को

जस्टिफाई कर लेता हूँ


इस शर्म से सदा के लिए मैं कैसे निपटूं ?

मुझे नहीं मालूम


मैं डर जाता हूँ 

जब मैं

सत्ता के भूखे भेड़ियों की

गन्दी राजनीति का शिकार होती

वर्तमान पीढ़ियों को देखता हूँ


लेकिन

इस डर के आगे मैं 

बेबस हो जाता हूँ

मूकदर्शक बन 

देखने के अलावा

मेरे पास

मेरे इस डर का

फिलहाल

कोई समाधान नही है


इस डर को मिटाने के लिए

मुझे क्या करना चाहिए ?

मुझे नहीं मालूम


आप मुझे

नकारात्मक सोच वाला 

एक नकारा इंसान कह सकते हैं


लेकिन असल मे मैं क्या हूँ ?

मुझे नहीं मालूम 


बस इतना जानता हूँ कि


जब तक...

एक भी आंख में आंसू है 

एक भी चेहरे पर उदासी है 

एक भी पेट भूखा है 

और एक भी मासूम 

डर के साये में है,


तब तक....


मैं यह नहीं मानूँगा की

समाज के लिए

मैंने कुछ बेहतर किया है

नहीं कभी नहीं,


मैं यह भी नहीं मानूँगा की 

आपने समाज के लिए

कुछ सार्थक किया है

नहीं कभी नहीं,


मैं यह भी नहीं मानूँगा

की महान आत्माओं ने

समाज के लिए

कुछ अच्छा किया है

नहीं कभी नहीं....


-शकील प्रेम





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