लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर - तर्कशील भारत

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Thursday, June 17, 2021

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर

 


अल्लाह का नाम था

हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा

सातवें आसमान पर

बंजर जमीं लहू से सराबोर थी

नजर भी तो न पड़ी 

इस जंग के मैदान पर


उहद का मैदान था

हर सख्स परेशान था

न फरिश्तों की शान थी

न अल्लाह का ध्यान था


अजीब था मंजर

हर हाथ मे था ख़ंजर

चमक रही तलवार थी

तीरों की बौछार थी


फिजायें मुख्तसर थीं

दुआएं बेअसर थीं


जाने क्या थी खराबी

पिट रहे थे सहाबी 


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


गुस्सा था तारी अबु सुफियान पर

तना था तीर हिन्द की कमान पर

अल्लाह का नाम था

हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा

सातवें आसमान पर


बदर में जो लुटे थे

उहद में लूट रहे थे 

बदर में जो कुटे थे

उहद में कूट रहे थे


कुछ आगे भाग निकले

कुछ पीछे छूट गये

प्यारे नबी के

कई दांत भी टूट गये


रसूल जमीन पर पड़े थे

जिस्म पर घाव बड़े थे

प्यारे नबी के प्यारे सहाबा

माले गनीमत पर अड़े थे 

तीरों की बौछार हुई

भयंकर तकरार हुई

नबी को घायल छोड़ 

सब भाग खड़े थे


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


परवाह थी किसे पैगम्बर की शान पर

साया था मौत का नबी की जान पर

अल्लाह का नाम था

हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा

सातवें आसमान पर


कर्बला का मैदान था 

यजीद परेशान था

दोनों तरफ की जंग में

हर सख्श मुसलमान था


कमजोर थे लाचार थे

फिर भी बेकरार थे

हाथों में तलवार लिए

हुसैन भी तैयार थे 


नफरतों की जंग में

तीर बरस रहे थे

घायल पड़े जमीन पर

प्यारे तड़प रहे थे

फ़िज़ाओं में लहू था

जमीं पर थीं लाशें

जो शहादतों से बच गए

वो प्यासे तरस रहे थे


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


ज़ुल्मतों का वक्त था अली की संतान पर

गिध्दों का जमघट था कर्बला के मैदान पर

अल्लाह का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर


लाशों के ढेर पर

करामाती मचल रहा था

दीवारें ढह चुकी थीं

काबा जल रहा था


हजारों मुजाहिदों को मारकर

काबे का गिलाफ फाड़ कर

ले गया संगेअसवद

दीवारों को उखाड़ कर


कुव्वत अपनी दुनिया को दिखाने में

असवद को जड़ दिया गुसलखाने में


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


कोई अज़ाब भी तो न आया ऐसे शैतान पर

बिजली भी न गिरी करामाती के मकान पर

अल्लाह का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर


पण्डों की जिद थी कि भगवान उतर आएंगे

गजनवी से अब हमें सोमनाथ ही बचाएंगे

भगवान के प्रकोप से कांप उठेगी ये धरा

धर्म के ये शत्रु हैं सब मिट्टी में मिल जाएंगे


महमूद की सेना आगे बढ़ती रही

खैबर को पार कर पहाड़ियां चढ़ती रही 

बारिश बिजली आंधी और तूफान 

सामने जो आया उससे लड़ती रही


न आया कोई अवतार  

न देवता ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न ईश्वर ही नजर आए 


गजनवी पहुंच गया सोमनाथ के द्वार पर

लूट लिया खजाना तलवार की धार पर

सोमनाथ का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो असहाय रहा शत्रु को जान कर


हलाकू ने खलीफा को लिखा कि 

मेरी ताकत को तस्लीम करो

मेरी हिकमत की ताजीम करो

खलीफा ने जवाब दिया

अल्लाह का बन्दा हूँ डरता नहीं किसी डाकू से

अल्लाह की मदद होगी मैं लड़ूंगा हलाकू से

हिकमत भी उसी की है

सजदा भी उसी का है

हिम्मत भी उसी की है

जज्बा भी उसी का है


उसी की रहमत है

उसी की बरकत है

मैं सांस ले रहा हूँ

ये उसी की नेमत है


बेमौत तू मरेगा होगी तुझपर ही कयामत

अल्लाह करेगा तुझसे बगदाद की हिफाजत


हलाकू की फौज ने

बगदाद को घेर लिया

शहर में घुसकर 

मस्जिदों को ढेर किया


हाफिजों को मारा मदरसों को जलाया 

शहर की सड़कों पर लाशों को बिछाया

खलीफा की बोटियों को कुत्तों को खिलाया

खलीफा की बेटियों को मंगोलों में बंटवाया


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


खून सवार था मंगोलों के इस खान पर

लाखों को कत्ल किया सिर्फ अपनी आन पर

अल्लाह का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर


दहक रही थीं तोपें बरस रहे थे तीर

छुपे थे चर्च में पादरी और वजीर


अंधेरा छा गया था भरी दोपहर में

आग ही आग था यहोवा के शहर में

कोई चर्च न रहा बाकी ईसु के नगर में

मौत का था मंजर यहोवा के इस घर मे 

पादरी खामोश थे दुआएं बेअसर थीं 

कुछ आग में जले कुछ दुब मरे नहर में


लहू को प्यासी थीं उस्मानिया की तलवारें

आखिर टूट गईं कुस्तुन्तुनिया की दीवारें 


हर घर से आग की लपटें निकल रही थीं

हजारों बुतों के ढेर पर लाखों बाइबिलें जल रही थी


क्रॉस तोड़े गये तस्वीर उतारे गये 

चुन चुन कर सारे पादरी मारे गये


न आया जिब्रील 

न फरिश्ते ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न करिश्मे ही नजर आए 


रूह कांप उठती है जुल्म की दास्तान पर

बद्दुआएं बेअसर होती हैं ऐसे हुक्मरान पर

अल्लाह का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर


भेड़िया डरा रहे थे और भेड़ डर रहे थे

चौकीदार सारे राजनीति कर रहे थे

प्रायोजित कार्यक्रम में व्यस्त थे सब चाटुकार 

ऑक्सीजन की कमी से तब लोग मर रहे थे


जिंदगी भर जिसने भगवान को था पोसा

वक्त आने पर किया वैक्सीन पर भरोसा


पोथियां गल चुकी थीं ग्रंथ सड़ चुके थे

भगवान के घरों पर ताले जड़ चुके थे


वीरान गालियां और सुनी सी डगर थी

जिंदगी का पता न मौत की खबर थी

कब्र में सुकूँ न श्मशान में जगह थी

प्रार्थनाएं व्यर्थ थीं दुआएं बेअसर थीं


भगवान के चेले और माटी के लाल 

छुप गये बिलों में अल्लाह के दलाल 


कोविड की लिस्ट में जिसका भी नाम आया

भगवान लापता था विज्ञान ही काम आया


न आया कोई अवतार 

न देवता ही उतर पाये

न हुआ कोई कमाल

न खुदा ही नजर आए 


जड़ दो अब ताले खुदा की दुकान पर

मर चुका है ईश्वर लिख दो हर मकान पर

ईश्वर का नाम था हर सख्श की जुबान पर

लेकिन वो बैठा रहा सातवें आसमान पर


-शकील प्रेम


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