राम के भरोसे - तर्कशील भारत

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Friday, May 7, 2021

राम के भरोसे

 अल्लाह के भरोसे कुछ राम के भरोसे

बैठे हैं लोग किसी गुमनाम के भरोसे

देने वाला कब देगा हाथ फैलाये बैठे हैं

छप्पर से गिरने वाले इनआम के भरोसे


रहते हैं प्यासे वो माहे रमजान में

जन्नत में मिलने वाले जाम के भरोसे


जो करते हैं हमेशा कल का इंतजार 

सुबह को भूल जाते हैं शाम के भरोसे


हक से है नफरत जहालत से है प्यार

कटती है जिंदगी झूठे पैगाम के भरोसे


न खुद की जुबां है न खुद का है वजूद 

वो जीते हैं पुरखों के नाम के भरोसे


कीमत के हिसाब से बिक रहे हैं लोग 

बाजार में खड़े हैं अच्छे दाम के भरोसे


-शकील प्रेम

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