मुझसे न हो पायेगा - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Tuesday, May 11, 2021

मुझसे न हो पायेगा

 मजहबों की आग में 

कुछ भी बच न पायेगा

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


फज्र या ज़ोहर पढूं 

सजदे में सर रखूँ

बुद्धि को गिरवी रखूँ

जियारत या हज करूँ


अल्लाह को अर्ज करूँ

सुन्नत या फर्ज करूँ 

झूठे मजहब के चक्कर मे

सर पर मैं कर्ज करूँ


यह सब फिजूल नहीं 

यह कौन मुझको बताएगा

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


कब्र से मैं रोज डरूँ 

घुट घुट के रोज मरूँ 

हाथ खोले गिड़गिड़ाऊं 

ऐसा रोज रोज करूँ


हूरों से मैं प्यार करूँ

जन्नत पर एतबार करूँ 

सिर पटकूं नाक रगडुं

ऐसा पांच बार करूँ 


मर कर तू देख बन्दे 

ऊपर कुछ न पायेगा 

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


मुहम्मद को नबी माँनूँ

कुरान को सच जानूँ

रस्सी को सांप कहूँ

अल्लाह को बाप कहूँ


पीरों को याद करूँ

मुर्दों से फरियाद करूँ

आख़िरत के नाम पर

जिंदगी बर्बाद करूँ


जान गया तेरी हिकमत 

क्या मुझको समझायेगा

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


चिल्ला या जमात करूँ

मजहब पर बात करूं

मस्जिद में दिन बिताऊं

या मुसल्ले पर रात करूँ


खुदा का गुणगान करूँ

पांच बार अजान करूँ

तराबीह पढ़ते हुए 

तीसों रमजान करूँ 


जितना भी नाक रगडुं 

हाथ कुछ न आएगा

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


जहन्नम की आग से डरता नहीं मैं 

खुदा के नाम पर लड़ता नहीं मैं

दूर रहता हूँ हवाई बातों से

सड़े हुए अक़ीदों पर चलता नहीं मैं


सात आसमानों पर

खुदा के दीवानों पर

मुझको भरोसा नहीं

झूठे अफसानों पर


जो चलेगा आंख मूंदे 

वो खाई में गिर जायेगा

सच कहूं तो यह सब 

अब मुझसे न हो पायेगा


-शकील प्रेम









No comments:

Post a Comment

Pages