आओ बदलाव की बात करें - तर्कशील भारत

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Sunday, May 2, 2021

आओ बदलाव की बात करें

 जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


सांसे थम रही हैं कदम भी रुक गए हैं 

जो चीरते थे पर्वत वो बदन भी थक गये हैं

रुक गई है धरती और थम गई हवाएं 

जम गया है दरिया खामोश हैं फिजायें


रुकी हुई हर धारा, आओ बहाव की बात करें

समंदर को चीर दे उस नांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें


हाथों में बन्धन कांधे पर बोझ लिए 

चल रहे हैं सभी वही पुरानी सोच लिए

न मंजिल का पता न रास्ते की खबर

पैर लाचार और बोझिल है नजर

बिखरते हैं ख्वाब सम्भलता कुछ नहीं

हड्डियां गलाकर भी बदलता कुछ नहीं


शहर आगे निकल चुके गांव की बात करें

बहुत हो चुका अब सुझाव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें


भीड़ की किस्मत जगाने अभिनेता जगते रहे

कुकरमुत्तों की तरह नेता उगते रहे

जाहिल महापुरुषों के पीछे हम सभी चलते रहे

भूखी जनता की मेहनत पर हरामखोर पलते रहे


जब हमने हक मांगा आश्वासन पूरा मिला

राशन पूरा मिला नहीं भाषण तो पूरा मिला

हवाई चप्पल वालों को जो हवा में ले जाते हैं 

भाषणों से ही हमेशा वो अच्छे दिन लाते हैं


नफरत न गर्मी न ताव की बात करें 

वक्त नहीं की हर पल चुनाव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें


राजतन्त्र न कर पाया गणतंत्र वो कर गया

भीड़ के पैरों तले लोकतंत्र भी मर गया

विकास नालों में बहा इरादे पूरे न हुए 

पीढ़ियाँ गुजर चुकीं वादे पूरे न हुए


वक्त न बिताओ अब सुनने सुनाने में

वोटों के अलावा और गम हैं जमाने मे 


जख्म है दिलों में उस घाव की बात करें 

उदास चेहरे के हर भाव की बात करें 

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें


बेबसी की भाषा या गमों की सदा होती

बहुत कुछ बयां होता गर दर्द की जुबां होती

आंसुओं को पोछने की गर रवायतें जवां होती

तस्वीर कुछ अलग होती तकदीर भी जुदा होती


नफ़रतें दिलों में, कोई मेल अब बाकी नहीं

बुझते हुए दियों में तेल अब बाकी नहीं 

जंग का मैदान बन चुकी है हर गली 

खेलते थे मिलकर वो खेल अब बाकी नहीं


श्याम के घर की गुजिया 

सलीम के घर की भुजिया

पीटर के घर का पानी 

और नानक की बिरयानी


घर से फिर निकलो, साथ आओ की बात करें

हांडी पर पकते गरम पुलाव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें हैं बहुत 

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें

कुछ पल के लिए तो बदलाव की बात करें


-शकील प्रेम


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