जातिवाद - तर्कशील भारत

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Wednesday, April 14, 2021

जातिवाद

 जब आप अपनी लकीर 

बड़ी करते हैं 

तब यह गलत नहीं होता

लेकिन 

जब आप 

अपनी लकीर बड़ी करने की खातिर

दूसरे की लकीर छोटी करते हैं

तब यह 

इंसानियत की सबसे घटिया सोच 

बन जाती है


जब आप 

अपनी जाति के उत्थान का

प्रयास करते हैं 

तब यह गलत नहीं होता

लेकिन जब आप

अपनी जाति के उत्थान की खातिर

दूसरी जाति के पतन का जतन करते हैं

तब यह जातिवाद हो जाता है

और फिर यह 

"जातिवाद"

मानवता की सबसे 

निकृष्टतम अवस्था बन जाती है


अपने उत्थान का जतन करना 

मानवता है

लेकिन दूसरे के पतन हेतु 

पोथियां लिखना 

मानवता के विरुद्ध एक 

भयंकरतम साजिश है


और इस साजिश को 

बेनकाब करना

प्रत्येक मानवतावादी का कर्तव्य है


जातिवाद नस्लवाद और श्रेष्ठतावाद

सभ्यताओं के माथे पर लगे 

कलंक हैं 


इन्हें मिटाये बिना

सभ्य समाज का निर्माण नहीं हो सकता


यही डॉ भीम राव अंबेडकर का स्वप्न था 


बाबा साहेब डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर

आप सभी को ढेर सारी बधाई..


-शकील प्रेम

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