अल्लाह की तारीफ क्यों ? - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Tuesday, April 13, 2021

अल्लाह की तारीफ क्यों ?

 सारी तारीफ 

अल्लाह के लिए 

वो रहमान है रहीम है

वो मालिक है करीम है

इस जुमलेबाजी से अलग भी

आपने कभी 

सोचने की हिमाकत की है ?


किस बात की तारीफ करें ?

कैसे मानें की वह रहमान है ?


जब पेट चीर कर

गर्भ के मासूम को

तलवार की नोक पर

लहराया जाता है 

तब उस रहमान को 

रहम क्यों नही आती ?


जब 

स्कूली बच्चों को 

बम से उड़ाया जाता है

तब रहमान के आंखों की रहम 

कहाँ गुम हो जाती है ?


जब पूरे परिवार को 

जिंदा जलाया जाता है

तब रहमान कहाँ मर जाता है ?


जब अबोध बच्चियों के जिस्म को

इंसानी भेड़िये नौच डालते हैं

तब उस अल्लाह की

हिकमत रहमत और ताकत 

क्यों नहीं काम करती ?


फिर तारीफ किस बात की ?


उसके मालिक होने की ?


अगर वह मालिक होता

तो मालिक होने का सुबूत देता ?


कोई मालिक 

सोने के सिंहासन पर ऐश करे

और उसके लोग

भूखों मरे

ऐसे मालिक की 

किसे जरूरत होगी भला ?

ऐसे मालिक की

तारीफ भी भला कौन करेगा ?


रियाया तकलीफ में हो और

बादशाह 

महलों के ऐशगाह में हो

तब रियाया 

ऐसे बादशाह की तारीफ में

कसीदे नहीं पढ़ती

बल्कि उसके खिलाफ

बगावत कर देती है


तो फिर इन दो कौड़ी के झूठे  

खुदाओं के खिलाफ बगावत क्यों न हो ?


रोम जल रहा हो

और नीरो बंसी बजा रहा हो

तारीख ऐसे जुल्मी बादशाह को

मसीहा बताया नहीं करता

इतिहास ऐसे शहंशाह की 

तारीफ में 

लफ्जों को ज़ाया नही करता

ऐसे नीरो को

कहीं किसी किताब में

हीरो नहीं माना जाता है

इतिहास के पन्नों में उसे 

खलनायक के तमगे के साथ ही

नवाजा जाता है


जो भूख दर्द आंसुओं की इंतहा करता हो

जो सातवें आसमान पर बैठ

बस इबादतों की इल्तजा रखता हो

जो न मानने वालों को

मुंह के बल घसीटता हो

जो पैगम्बरों के जरिये

अपने होने का

ढिंढोरा पीटता हो

जो दिलों में नफरतों के आंच

सुलगाये रखता हो

जो बेकसूरों के लिए

जहन्नम की आग 

जलाये रखता हो

जो इंसानी हकूकों को

बेरहमी से तोड़ता हो

जो मजलूमों को 

जालिमों के हवाले छोड़ता हो

जो जिस्म से बोटियों को नोचता हो

ऐसे आदमखोर भूखे भेड़ियों को

जो पोसता हो

जो सच बोलने वाले 

मुल्हिदों से नाखुश होता हो

जो नमकहरामों की दलाली 

से खुश होता हो


ऐसे परवरदिगार से बड़ा खलनायक कौन भला ?


दरअसल 

अल्लाह नाम का वायरस 

सिर्फ चन्द दिमागों की ईजाद है


जो दुनिया को 

हथियारों से तबाह न कर पाये

उन्होंने ही

ईश्वर अल्लाह गॉड नामक

घातक विचारों का आगाज़ किया


जो दुनिया को

बमों से न उड़ा पाये

उन्होंने ही 

ईश्वर अल्लाह गॉड नामक 

विस्फोटक पदार्थों का ईजाद किया


जो दुनिया को 

तलवारों से छलनी न कर पाए

उन्होंने ही 

ईश्वर अल्लाह गॉड नामक

खतरनाक तीर कमानों का 

आविष्कार किया


जो दुनिया को

महामारी से न मार पाये

उन्होंने ही

ईश्वर अल्लाह गॉड नामक

खौफनाक

विषाणुओं को पैदा कर दिया


इसलिए,


मैं बार बार कहता हूँ 

वो नहीं है नहीं है कहीं नहीं है


और जो नहीं है


उसकी शिद्दतों से ऐसी तलब ही क्यों

गर है भी तो ऐसे जालिम से मतलब ही क्यों


जो नहीं है उसकी तारीफ बेमानी है

उसकी तारीफ में लिखी आयतें शैतानी हैं


हक़ीक़ते दिल तेरा इजहार करता हूँ

मुनकिर हूँ खुदा का इनकार करता हूँ

तुम्हारी हरकतों से मैं परेशान रहता हूँ

डरपोक नहीं हूँ मगर सावधान रहता हूँ 

उड़ गया कोई गधा सात आसमानों में

ऐसी हवाई बातों से हैरान रहता हूँ 


झूठ के सौदागर हो भय बेचते हो

मजहब नहीं इसे मैं दुकान कहता हूँ

दर्द और सितम का जिम्मेदार है वही

तुम खुदा समझते हो उसे मैं शैतान कहता हूँ


-शकील प्रेम





No comments:

Post a Comment

Pages