ज्योतिबा फुले - तर्कशील भारत

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Sunday, April 11, 2021

ज्योतिबा फुले

 ख्वाब तो सभी देखते हैं

लेकिन कुछ लोगों की आंखों में

दुनिया को 

बदलने का ख्वाब होता है

ऐसे लोग जिंदगी के 

किसी भी पल को खोते नहीं

अपने ख्वाबों को

पूरा करने की खातिर

पूरी जिंदगी सोते नहीं

ऐसे लोग

सूर्य बन कर

दुनिया के अंधेरों को

मिटाते चले जाते हैं

और "ज्योति" बन कर

क्रांति का दीपक 

जलाते चले जाते हैं


200 साल पहले 

आज ही के दिन

ऐसा ही एक सूरज

पूरब की ओर से

उदित हुआ था 

जिसका नाम था 

"ज्योतिबा फुले"


जिस दौर में

डार्विन

बीगल पर बैठ

अफ्रीका की यात्रा पर 

"विकासवाद" को पढ़ रहे थे

ठीक उसी वक्त

ज्योतिबा 

महाराष्ट्र की गलियों में

"विनासवाद" के विरुद्ध 

लड़ रहे थे


जिस समय

डार्विन 

"ओरिजिन ऑफ स्पीशीज" 

लिख रहे थे

इसी दौर में

ज्योतिबा

"गुलामगिरी"

रच रहे थे 


डार्विन ने 

दुनिया को समझाया की

सभी जीव 

"एवोल्यूशन" की प्रक्रिया से 

गुजर कर ही 

आज वजूद में हैं

तो 

ज्योतिबा ने हमें बताया

की सभ्यताएं 

"रेवोलुशन" की प्रक्रिया से 

गुजरे बिना आगे नहीं बढ़ सकतीं


डार्विन ने दुनिया को बताया कि

जो जीतेगा वही जियेगा

यानी

सर्वाइवल ऑफ फ़िटेस्ट


ज्योतिबा ने हमें सिखाया

जो सीखेगा वही जीएगा

यानी

सर्वाइवल by नॉलेज


डार्विन ने बताया

की रंग नस्ल जात क्षेत्र भाषा 

और जन्म के आधार पर

नेचर में कोई 

भेद नहीं


ज्योतिबा ने कहा

जात गोत्र धर्म 

और नस्ल के आधार पर

प्रकृति में कोई 

ऊंच या नीच नहीं


डार्विन पश्चिम के सूरज हैं

तो ज्योतिबा पूरब के ज्योति हैं


ज्योतिबा फुले के जन्मदिवस पर 

आप सभी तर्कशील साथियों को ढेर सारी बधाई


शत शत नमन

-शकील प्रेम

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