वे सिर्फ गोश्त के भूखे हैं - तर्कशील भारत

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Monday, March 8, 2021

वे सिर्फ गोश्त के भूखे हैं

 मलाला को सजा 

किस बात की मिली 

लड़की होने की ?

जी नहीं

तहजीबों की खोल में

लिपटी 

लड़कियों की तो सख्त जरूरत है उन्हें,


दरअसल

मलाला को 

लड़की होने की नहीं 

बल्कि लड़की होकर 

हिमाकत करने की सजा मिली

उसे तहजीब की खोल से

बाहर निकलने की सजा मिली

वर्ना 

रवायतों से ढँकी लड़कियों की तो

सख्त जरूरत हैं उन्हें


मना किया था न 

कदमों को रोक लो

वो नहीं मानी

उसे लगा 

ये चन्द अफ़राद हैं 

जिन्हें मजहब का इल्म नहीं

खुदा भला 

हमारे कदमों को क्यों रोकना चाहेगा ?


मासूम थी

उसे मालूम नहीं था

यह चन्द अफ़राद

खुदा के ही खादिम हैं

जो उसके हुक्म की तामील में

दुनिया पर हुकूमत चाहते हैं

इसलिए उन्हें

आजाद लड़कियां बिल्कुल पसंद नहीं


हँसती हुई 

मुस्कुराती हुई 

खुशमिजाज

बिंदास

चहलकदमी करती हुई

या पढ़ती पढ़ाती हुई 

लड़कियां तो उन्हें

बिल्कुल पसंद नहीं

लेकिन

हुक्म बजा लाती गुलाम लौंडियों की तो

सख्त जरूरत है उन्हें


जब जी चाहे

वो तुम्हे फैंटे

ताश की तरह

टेबल के किसी कोने में 

पड़ी रहो,

जब जी चाहें

वो तुम्हे रौंदे

लाश की तरह

घर के किसी कोने में

पड़ी रहो


वे तुम्हारी आँखों मे

सिर्फ शबाब देखने के

मुन्तज़िर हैं

तुम्हारी आँखों में

ख्वाब हों

यह उन्हें मंजूर नहीं

उन्हें 

तिरछी नजरों वाली 

बेजुबान लड़कियां

बेहद पसंद हैं

आँखे तरेरने वाली 

लड़कियां तो उन्हें बहुत बुरी लगती हैं


वे सिर्फ गोश्त के भूखे हैं

इसलिए

थाली में जिस्म परोसने वाली 

लड़कियों की

सख्त जरूरत हैं उन्हें....


-शकील प्रेम

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