एक्स-मुस्लिम - तर्कशील भारत

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Monday, March 1, 2021

एक्स-मुस्लिम

 इंसानियत की संकुचित 

सरहदें बड़ी हो रही हैं

क्योंकि अब

पूर्व मुस्लिमों की 

बड़ी जमातें खड़ी हो रही है 

जो पोथियों को पढ़ रहे हैं 

और सच्चाई के लिए लड़ रहे हैं

जब भी मैं

किसी नये

एक्स-मुस्लिम से परिचित होता हूँ

मुझे लगता है कि 

मेरा सीना मचल रहा है

और जमाना बदल रहा है

इनसे मिलकर

लगता है कि

सत्य प्रेम और परिवर्तन की

खुशगवार हवाएं 

बहनी शुरू हो चुकी हैं

और इस्लाम की

14 सौ साल पुरानी

मजबूत इमारत

ढहनी शुरू हो चुकी है

मैं चाहता हूँ कि

हर मुस्लिम नौजवान

भगत सिंह की तरह नास्तिक बने

और दुनिया को बताए

की वह नास्तिक क्यों है ?


मुस्लिम युवा

जब तक 

अपने दकियानूसी अक़ीदों की

जिद को

लात मार कर 

सड़े हुए मानसिक विकारों की जद से

बाहर नहीं निकलेगा

तब तक 

धरती कराह कर कहती रहेगी

कायनात में

कहीं जहन्नम है

तो यहीं है यहीं है यहीं है


और जिस दिन

मुस्लिम नौजवान

इस्लाम की झूठी और जाहिलाना 

सोच से बाहर निकल जायेगा

तब वह हर तरफ

सच्चाई का गुलिस्तां सजा देगा 

और इस दुनिया को ही जन्नत बना देगा

जहां खुशियों की नहरें बह रही होंगी

और इस जन्नत में रहने वाली

खूबसूरत हूरें उससे कह रही होंगी

की कायनात में 

गर कहीं जन्नत है तो यहीं है

यहीं है यहीं है


तो मेरे साथियों उठो जागो 

और बुराइयों को लात मार कर

अच्छाइयों की ओर भागो


जिंदगी बहुत छोटी है मेरे दोस्त

इसे फिजूल विचारों का

कब्रिस्तान न बनने दो

जिंदगी बहुत कीमती है मेरे दोस्त

इसे झूठ और बेवकूफियों का

कूड़ेदान न बनने दो


-शकील प्रेम

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