मैं इस्लाम का विरोध क्यों करता हूँ - तर्कशील भारत

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Monday, February 22, 2021

मैं इस्लाम का विरोध क्यों करता हूँ

 एक सवाल 

मुझसे अक्सर पूछा जाता है की

मैं सिर्फ इस्लाम का ही विरोध 

करता हूँ ?

क्या मैं बाकी मजहबों से डरता हूँ ?

नहीं मेरे दोस्त 

मैं किसी अजनबी से 

कभी यूँही लड़ता नहीं 

हर झूठ का विरोध करता हूँ 

किसी से डरता नहीं 

इस्लाम से 

मेरी कोई जाती दुश्मनी नहीं है 

लेकिन

झूठे अक़ीदों से मेरी कभी बनी नहीं है

बस सच की हसरत है मुझे

और झूठ से नफरत है मुझे 

मैं कपटपूर्ण मानसिकता पर

क्रोध करता हूँ 

रूढ़ हो चुके विचारों पर

शोध करता हूँ 

अध्ययन के मार्ग पर

सत्य का बोध करता हूँ

इसलिए मैं हमेशा

इस्लाम का विरोध करता हूँ

आप फिर पूछेंगे की 

इस्लाम ही क्यों ?

क्या दूसरे मजाहिब की 

गलतियां माफ हैं ?

या मेरी नजर में

इस्लाम ही गलत है 

बाकी पाक साफ हैं ?

नहीं मेरे दोस्त

नफरतों के रंग में सब रँगे हैं 

जहालत के हमाम में यहां सब नँगे हैं

लेकिन 

इस्लाम की दकियानूसी में

मेरा दिल रोया है

इस्लाम की वजह से मैंने

बहुत कुछ खोया है

मैं समझता हूँ

इस्लाम मे नफरत नहीं

नफरत ही इस्लाम है

इस्लाम में जहालत नहीं

जहालत ही इस्लाम है

मैं इंसानियत की हिफाजत करता हूँ

इसलिए मैं हमेशा 

इस्लाम की मुख़ालफ़त करता हूँ


-शकील प्रेम


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