मेरी दुनिया - तर्कशील भारत

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Monday, February 8, 2021

मेरी दुनिया

 अनुत्तरित प्रश्नों के श्मशान में

जिज्ञासाओं की 

जलती चिताओं के बीच 

खड़ा मैं

असमंजस में हूँ

अपनी दुनिया मे

वापस लौट जाऊं

या 

किसी चिता पर लेट कर

मैं भी 

अनुत्तरित हो जाऊं

सदा के लिए.....


मेरी दुनिया ?

हाँ मेरी दुनिया

जिसमे मैं

सत्य की आस में था

प्रेम की तलाश में था

लेकिन

सत्यवादियों की उस दुनिया मे

सब कुछ है 

बस सत्य नहीं है

हवस के भूखे भेड़ियों के बीच

वासना का साम्राज्य है 

बस प्रेम नहीं है...

इसलिए

ईमानवालों के कब्रिस्तान में

दफन हो चुकी सच्चाइयों के बीच

खड़ा मैं 

असमंजस में हूँ

अपनी दुनिया मे

वापस लौट जाऊं

या 

किसी कब्र में लेट कर

मैं भी 

अनुत्तरित हो जाऊं

सदा के लिए.....


-शकील प्रेम


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