वे जो नबियों से भी अज़ीम थे - तर्कशील भारत

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Thursday, January 7, 2021

वे जो नबियों से भी अज़ीम थे

 हम किसी सख्शियत को इसलिए मानते हैं क्योंकि उसने दुनिया को कुछ न कुछ दिया है न्यूटन ने ग्रेविटी समझाई तो आइंस्टीन ने थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दी डार्विन ने एवोल्यूशन समझाया तो एडिसन की वजह से हमारी रातें जगमगा उठीं इस तरह ये सारे नाम इतिहास में अमर हो गए इन महान सख्शियतों ने दुनिया को जो दिया कोई पैगम्बर भी वह न दे सका इंसानियत हमेशा इन आला सख्शियतों की शुक्रगुजार रहेगी क्योंकि इंसानियत को सीधा और सच्चा रास्ता इन्हीं चन्द रहनुमाओं ने दिखाया वह काम जो एक लाख चौबीस हजार नबी मिलकर न कर सके इन चन्द अजीम शख्शियतों ने कर दिखाया.


इंसानियत के लिए पहले पैगम्बर ने क्या किया ? आदम की कोई उपलब्धि ढूंढे से भी नहीं मिलती उसने अपनी दाईं पसली से हव्वा का ईजाद किया फिर दोनों मिलकर दुनिया की आबादी बढ़ाने में मुब्तिला हो गये और अपनी संतानों को अल्लाह के भरोसे छोड़ दोनों जन्नत की ओर रवाना हो गये फिर वही आदम की संताने एक दूसरे को नोचतीं रहीं कत्लोगारत मचातीं रहीं एक दूजे को लूटती रहीं एक दूजे की बस्तियां जलाती रहीं न आदम के कानों जूं रेंगी न उसके खुदा को कोई फर्क पड़ा. आदम से अजीम सख्शियत तो ऐडम स्मिथ साबित हुए जिन्होंने दुनिया को नैतिकता का दर्शन सिखाया ऐडम स्मिथ को हम गर्व से इकॉनमी का पिता कह सकते हैं लेकिन आदम को मानवता का पिता कहें यह हमारी भूल होगी.

अब्राहम खुदा की तलाश में कई जगह भटका तो कोलम्बस नई दुनिया की खोज में भटका दोनों के इस भटकाव में जीत कोलम्बस की हुई अब्राहम को खुदा की ओर से इनाम में दुम्बा मिला तो कोलम्बस को अपनी मेहनत के नतीजे में अमेरिका मिला अब्राहम की खोज से मानवता का कुछ भी भला न हुआ लेकिन कोलम्बस की तलाश ने अमेरिका बसा दिया.

मूसा को पहाड़ के पीछे बुला कर खुदा ने मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात से दो पत्थरों पर लिखीं खामोश इबारतों के सिवा कौम को क्या मिला ? वो जन्नत का सेव नहीं था जिसे शैतान के बहकावे में आकर हव्वा ने खा लिया था बल्कि न्यूटन को बगीचे का एक मामूली सेव ही तो मिला था जिससे इंसानियत को ग्रेविटी की समझ हासिल हुई.

खुदा को अपना बेटा दुनिया मे भेजना था इसलिए उसने एक कुंआरी लड़की को हामला कर दिया यह भी न सोचा कि इसके नतीजे में उस लड़की को मआशरे की कितनी जिल्लतें झेलनी पड़ेगी ? मदर मेरी ने ईसू को जन्म दिया सिर्फ इसी बात के लिए गर वह इबादत का मर्तबा रखतीं हैं तो मैरी स्क्लाडोवका को ये दर्जा क्यों नहीं जिन्होंने रेडियम की खोज की थी मैडम मैरी और मदर मेरी में फर्क बस इतना ही है कि एक ने खुदा की जिद के लिए कुंआरे पन में बच्चा पाया तो दूसरी ने खुद की जिद की खातिर दो नोबल इनाम हासिल किया मदर मेरी ने भविष्य की औरतों को सीख दी कि तकदीर में लिखे को खुदा की मर्जी समझ घुट घुट कर जीती रहे और मैडम मेरी ने आने वाली पीढ़ियों को नसीहत दी कि औरतें किसी भी मामले में मर्दों से कमतर नहीं हैं चाहे वो फिजिक्स हो कैमेस्ट्री. 

ईसू ने दुनिया को क्या दिया ? पानी से मछली निकाल लेना गर पैगम्बरी है तो आज के सारे मछुआरे पैगम्बर क्यों नहीं हैं ? कोढ़ी को ठीक कर देना गर नबी होने की अलामत है तो आज के सारे डॉक्टर नबी क्यों नही हैं ? चमत्कार करने वाले गर खुदा का बेटा होने की कैफियत रखते हैं तो भारत के बी. प्रेमानन्द 15000 चमत्कार जानते थे जिससे उन्होंने फर्जी बाबाओं की खटिया खड़ी कर दी थी सत्य साईं भी उनके डर से कांपता था उन्होंने तो कभी खुद को खुदा का बेटा नहीं कहा वो चाहते तो आज उनके भी करोड़ों भक्त होते लेकिन उन्हें कभी नबूवत की खुजली भी न हुई बल्कि वे तो जिंदगी भर चमत्कारों के पीछे के वैज्ञानिक सच को दुनिया के सामने लाते रहे जिससे लाखों लोग बाबाओं के चंगुल में फंसने से बच गये इसलिए मेरी नजर में बी प्रेमानन्द की किताब विज्ञान बनाम चमत्कार जीसस की बाइबिल से कहीं ज्यादा पवित्र है राइट बन्धु जिन्होंने जहाज बनाया उन्हें भी पैगम्बरी का शौक पैदा न हुआ वर्ना जीसस और हारून की तरह ये दोनों भाई भी आज नबी हो जाते.

हजरत मुहम्मद ने इंसानियत को क्या दिया ? जिब्रील की फर्जी कहानी कुरान के नाम पर बरगलाने की नसीहतें झूठ लूट और मक्कारी की दास्तानें अल्लाह के नाम पर मुहाफिजों की बढ़ती आबादी हज के नाम पर इंसानी मेहनत की सालाना बर्बादी एक माह भूखे रहने का ढकोसला सर तन से जुदा करने का हौसला दिन में पांच मर्तबा खामख्वाह की कसरतें 72 हूरों की हैवानियत भरी हसरतें नबूवत से प्यार 72 फिरकों का इल्मी बंटाधार.

हजरत साहब के वजूद से इंसानियत को इसके अलावा और कुछ हासिल हुआ तो वह था स्पेस जर्नी विद अ डोंकी.

गदही पर बैठ स्पेस में जाकर भी क्या हासिल कर लिया ? 50 वक्त की नमाजें ? जिसे बाद में काफी मशक्कत के बाद 5 वक्त की करवाईं क्या यही हजरत साहब की सबसे बड़ी खोज थी ? लेकिन इससे इंसानियत का क्या भला हुआ ? वह सातों आसमान के सफर से पृथ्वी पर लैंड करते वक्त इतना भी न देख पाए कि धरती गोल है तो इतने लंबे सफर का आखिर क्या फायदा ? अरब के हजरत साहब से ज्यादा बड़ा काम तो पुर्तगाल के Ferdinand Magellan ने कर डाला था सातों आसमान तक जाने के बजाए वे सातों महाद्वीप के चक्कर लगा आये और दुनिया को खबर दे दी कि धरती गोल है. 

सारे अवतार मिलकर भी जो काम न कर सके वो काम अकेले डॉ अम्बेडकर ने कर दिया डॉ अम्बेडकर की 21 किताबें 22 प्रतिज्ञाएं और एक संविधान के आगे चारों वेद 18 पुराण रामायण महाभारत और मनुस्मृति धूमिल हो गये इनमें लिखे सूक्त मन्त्र और श्लोकों की गर्माहट "मूकनायक" के आगे ठंडी पड़ गई.

सारी आसमानी किताबों को गर तराजू के एक पलड़े में ठूंस दिया जाए तो भी डार्विन की लिखी किताब the origin of स्पीशीज उन सभी पर अकेले भारी पड़ेगी. 

अब्राहम लिंकन मार्टिन लूथर किंग राजा राम मोहन राय और ईश्वरचंद विद्यासागर जैसी अजीम सख्शियतों ने इंसानियत के माथे पर लगे उस कलंक को मिटाया जिसे दुनिया के तमाम खुदा मिलकर भी न मिटा सके थे इसलिये आज इंसानियत को किसी आसमानी खुदा की जरूरत नही और न ही दुनिया को आसमानी किताबों की दरकार है यह जमीन आसमानी किताबों के कचरे से अटी पड़ी है जिन्हें फूंके बिना धरती का एनवोर्न्मेंट साफ नही होगा.

-शकील प्रेम

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