सावित्री अमर रहें - तर्कशील भारत

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Sunday, January 3, 2021

सावित्री अमर रहें

 वह घोड़े पर बैठ कर

तलवार हाथ मे लेकर

अंग्रेजों की 

साम्राज्यवादी नीतियों से 

लड़ने वाली

वीरांगना नहीं थी

अपितु

जमीन पर चलकर

कलम हाथ मे लेकर

समाज की 

सड़ी हुई 

मानसिकता के विरुद्ध

लड़ने वाली 

एक क्रांतिकारी महिला थी

जिसका नाम था

सावित्री.


ममता बनर्जी 

मायावती और निर्मला से

दो सदी पहले

इंद्रा से

डेढ़ सौ साल पहले

और

मैडम क्यूरी से भी

सौ साल पहले

जब 

डार्विन 

मनुष्यता के वास्तविक

इतिहास की खोज में 

बीगल पर बैठ 

अफ्रीका की यात्रा पर थे

ठीक उसी समय

सावित्री भी 

किताबें हाथों में लिये

तिरस्कार को आत्मसात किये

इंसानियत की खोज में

गांवों की यात्रा पर थीं.


डार्विन ने दुनिया को

एवोल्यूशन की समझ दी

तो सावित्री ने

भारत को वास्तविक

विकासवाद का पाठ पढ़ाया

डार्विन ने 

धर्म की युगों पुरानी

अवधारणाओं को

खण्डित कर दिया तो

सावित्री की वजह से

जड़ हो चुकी

कुंठाएं टूट गईं

सड़ चुकी मान्यताएं

पीछे छूट गईं

परंपराओं के युगों पुराने 

बन्धन से

नारी मुक्त हो गई

संस्कारों की कठोर 

बेड़ियां भी सदा के लिए

नष्ट हो गईं


नारीमुक्ति दिवस पर

आप सभी नारियों को 

हार्दिक बधाई.


सावित्री अमर रहें.


-शकील प्रेम


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