आध्यात्म योग मेडिटेशन और विपस्सना का काला सच - तर्कशील भारत

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Sunday, December 27, 2020

आध्यात्म योग मेडिटेशन और विपस्सना का काला सच

 मेडिटेशन या कहें तो विपस्सना यह शब्द कहने सुनने में जितना आकर्षक लगता है इसे प्रेक्टिस करने में मन को उतना ही अच्छा लगता है लेकिन बात केवल "अच्छा लगने" भर का नहीं है स्प्रिचुअलिटी के फ्लेवर में लपेट कर जब इसकी इंटरनेशनल मार्केटिंग होती है तब यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर केवल खाये पिये अघाये वर्ग का शौक बन कर रह जाता है वैसे यह आम आदमी के लिए कभी था भी नहीं इसलिए स्पृचिउअल्टी और मेडीटेशन की महंगी दुकानें गांवों कस्बों से दूर महंगे शहरों का ही हिस्सा होती हैं मेडिटेशन और स्पृचिउअल्टी गरीब के लिए नहीं है बल्कि यह पब स्पा और नाइट क्लब की तरह ही अमीर मन को शांत रखने का बिजनेस ही तो है. 


गरीब मन को शांत रखने के लिए उसके अपने सस्ते जुगाड़ होते हैं जादू टोना मजारबाजी सड़कछाप मंदिरों में शनि को तेल या हनुमान को बूंदी इन्ही सस्ते टोटकों में गरीब को स्प्रिचुअलिटी का मजा मेडिटेशन का सुख और उसे उसकी मुश्किलातों का हल मिल जाता है तो उसे अपनी सस्ती जी जिंदगी के लिए महंगे आध्यात्म और महंगी विपस्सना की क्या जरूरत ?

क्रूज पर भागवत कथा कहने/सुनने वालों और बुर्ज खलीफा में अफ्तार की दावत खाने/खिलाने वालों की एक महीने की कमाई में न जाने कितने जुम्मन और दुखिया का घर बन जाये लेकिन गुरबत की खाई को भरने का ठेका क्रूज वाले या बुर्ज वाले ही क्यों उठाये ? भाग्य भी कौनो चीज है कि नाही ?? जो पेट भरने के लिए सड़कों पर दौड़ रहा है यह उसका मुकद्दर है और जो पेट को कम करने के लिए ट्रेडमिल पर दौड़ रहा है यह उसकी किस्मत है दोनों अपने अपने लिखे को भोग रहे हैं तो फिर रोना किस बात का है ?

गरीब इतना भी बेवकूफ नही होता ?? दिन भर खटने से भी तकदीर न पलटे तो चमत्कार का विकल्प तो हमेशा गरीब के साथ होता ही है न ? अब आप उसे बुड़बक कह सकते हैं लेकिन न जाने कब छप्पर फ़ट जाए और उसका मुकद्दर पलटी मार जाए इसलिए गरीब की आधी कमाई पूजा पाठ नमाज दुआ बाबा जी की कृपा और माता जी के आशीर्वाद में चली जाये तो उसे कोई गम नहीं जिम्मेदारियों का बोझा ढोते ढोते हड्डियां गल जाएं तो क्या ?? ऊपरवाले की कृपा बनी रहें बस...

मन को शांति देने वाले हाई प्रोफाइल बिजनेस में अमीर की औकात के हिसाब से स्प्रिचुअलिटी और मेडिटेशन का मेन्यू तैयार है वह फाइव स्टार में सत्यनारायण कथा सुनें उसे कोई बुड़बक नहीं कहेगा या वह सात समंदर पार जाकर मेक्सिको में मेडिटेशन करे या अलास्का की पहाड़ियों में कुछ दिनों योग का महंगा सप्लीमेंट ले कर आये उसे कोई बेवकूफ नहीं कहेगा क्योंकि उसे अपनी किस्मत को एन्जॉय भी तो करना है इसमें गलत का है ? 

योग से तन को स्फूर्ति मिल जाती है मेडिटेशन से मन को शांति मिल जाती है और स्प्रिचुअलिटी से आस्था को बल मिल जाता है अमीर के लिए कीमत चाहे जो हो सौदा घाटे का नहीं.

50 रुपये का प्रसाद या सौ रुपये की चादर में गरीब जैसे तैसे अपने आध्यात्मिक सुख को ढूंढ लेता हैं फिर भी उसकी सस्ती आस्था के बदले उसे कई बार महंगी कीमत चुकानी पड़ती है इसलिए तीर्थ का एक्सपेंसिव खर्च वह हर बार नहीं उठा पाता धाम के चक्कर मे रही सही जमीन बिक जाने का पूरा रिस्क होता है इसलिए गरीब को सस्ते में ही परमानन्द की प्राप्ति का जुगाड़ खोजना पड़ता है.

एक अमीर को जो सुख मेडिटेशन के महंगे बिल से नहीं मिलता एक गरीब मूत्र विसर्जन के बाद हर बार उस परम सुख को मुफ्त में पा लेता है इसलिए मेडिटेशन की जरूरत गरीब को नहीं होती.

-शकील प्रेम

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