क्रिसमस - तर्कशील भारत

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Friday, December 25, 2020

क्रिसमस

 आज के दिन सांता का फर्जी केरेक्टर पूरी दुनिया मे छा जाता है पूरे साल मिशनरियों से नफरत करने वाले भी आज के दिन क्रिसमस की बधाई देते हैं ईसू की कृपा से सऊदी अरब तुर्की पाकिस्तान की गलियों में भी सांता पहुंच चुका है और धडल्ले से बिक रहा है आस्था और आधुनिकता का अनूठा संगम है 25 दिसम्बर लेकिन जहां आस्था होगी वहां मजाल की सवाल पैदा हो ? तर्क को सूली पर चढ़ाये बिना आस्थाएं जिंदा भी तो नहीं रह सकतीं.

अपनी कुंठाओं को शांत करने के लिए यहोवा एक नाबालिग लड़की को प्रेग्नेंट कर देता है वह दुनिया भर की तृष्णा झेलती हुई ईश्वर के बेटे को जन्म देती है खुदा का वही प्यारा बेटा सूली पर ठोक दिया जाता है लेकिन खुदा कुछ नहीं कर पाता बाद में वही नबी हो जाता है यहां तक ठीक है कहानी मजेदार है लेकिन इस कहानी के नाम पर पढ़े लिखे लोग भेड़चाल का हिस्सा हो जाएं यह कहाँ तक जायज है ?

दरअसल हमे आस्थाओं का कचरा ढोते रहने की आदत है सांता हो या संतोषी हम ढोने में माहिर हैं पीढियां गुजर जाएं हमारी आस्थाएं हमेशा जवां ही रहती हैं अरब के रेगिस्तानों की तपी हुई आस्थाएं भी तो हम लादे हुए ही हैं न ? फिर सांता को सर पर बैठाने में हर्ज ही क्या है ? 

सांता के फर्जी केरेक्टर से आखिर हम किसे भरमा रहे हैं ? बच्चों को या खुद को ? सड़कों पर न जाने कितने बच्चे आज भी भूखे सोएंगे आज भी कई ठंड से मारे जाएंगे कई इलाज के बिना तड़प तड़प कर मरेंगे उनतक कोई सांता कभी पहुंचेगा ? 

काश कोई ऐसा सांता रियल में होता तो मैं बड़े गर्व से कहता "हैप्पी क्रिसमस"

-शकील प्रेम

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