अल्लाह कौन है ? - तर्कशील भारत

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Thursday, December 10, 2020

अल्लाह कौन है ?

आज हम बात करेंगे अल्लाह की 

अल्लाह कौन है

वो कहाँ रहता है 

वो क्या करता है

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कल्ट है इस्लाम और इस कल्ट में फंसे लोग एक सर्वशक्तिमान गॉड को मानते हैं जिसका नाम है अल्लाह.

अल्लाह के बारे में मुसलमानों का दावा है कि उसने ही यह कायनात बनाई वही इस यूनिवर्स को चला रहा है वही है जो इंसानों की जिंदगी के अच्छे बुरे आमाल पर नजर रखता है इस दावे के पीछे दलील यह है कि ऐसा उनके रसूल ने 14 सदी पहले बताया था मतलब की अल्लाह के बारे में पेश किए गए सारे सबूत सिर्फ और सिर्फ एक आदमी की कहानी पर बेस्ड हैं जो 14 सदी पहले मर चुका है. आज इक्कीसवी सदी में छठी सदी के एक आदमी की कही गई बकवासों के आधार पर हम अल्लाह पर यकीन रखते हैं इसके अलावा अल्लाह के होने का सबूत और कहीं नहीं है सुबूत के तौर पर यदि कुछ है तो छठी सदी की एक किताब.

किसी किताब के पन्नों में लिखी इबारतों में इतिहास ढूंढा जा सकता है लेकिन वर्तमान नहीं इसलिए वर्तमान की किसी बात को साबित करने के लिए किताबी सबूत मायने नहीं रखते.

आज अगर कोई अल्लाह को मानता है इसका अर्थ है कि अल्लाह वर्तमान में भी मौजूद है अब हम कैसे माने की अल्लाह नाम का कोई प्राणी आज सच मे है या नहीं ? 

अल्लाह पर सवाल उठाओ तो एक ही जवाब सुनने को मिलेगा की कोई तो होगा जिसने यह कायनात बनाई ? तो वह अल्लाह ही है इसका क्या सबूत है ? या कोई राम कृष्ण ब्रह्मा यहोवा ही है यह भी तो निराधार बातें हैं जब सवाल ही गलत हो तो जवाब ढूंढते रहिये कुछ हासिल नहीं होगा और यह सवाल ही गलत है कि कोई तो होगा जिसने यह कायनात बनाई ? सृष्टि में कभी भी कुछ भी बनता नही है प्रकृति में होने वाला हर इवेंट उससे पहले की किसी दूसरी घटना का परिणाम होता है इस तरह हम देखते हैं कि कायनात में कुछ भी बनता नहीं है बल्कि विकसित होता है जब बना ही नहीं तो बनाने वाला कहाँ से आ गया ? फल से बीज बीज से पौधा पौधे से पेड़ पेड़ से फल.

ठीक इसी तरह यह कायनात काम करता है कुछ इवेंट के पीछे के रीजन को हम समझ चुके हैं और कुछ कारणों को समझना अभी बाकी है जिन घटनाओ के पीछे के कारणों को हम नही जानते उसके लिए यह मान लेना कि कोई अल्लाह है यह हमारा दिमागी दिवालियापन ही है अब तक हमने अपने ज्ञान विज्ञान शोध और परिक्षणों से जो जाना है उसका निष्कर्ष यह है कि सृष्टि के बनने बिगड़ने में अल्लाह जैसे किसी भी काल्पनिक केरेक्टर का कोई रोल नही क्योंकि ऐसा कोई विचित्र प्राणी है ही नहीं.

सिर्फ आस्था के अलावा अल्लाह को मानने की कोई ठोस वजह मुसलमानों के पास नहीं है यही बात तमाम मजहबी खुदाओं पर भी लागू होती है लेकिन आज मैं बात करूंगा सिर्फ अल्लाह की क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी का आधा हिस्सा अल्लाह के नाम पर तबाह किया है.

सबसे पहले हमें उस दावे की पड़ताल करनी होगी जिसके आधार पर अल्लाह को साबित किया जाता है यानी कि आसमानी किताब.

इस किताब के आधार पर अल्लाह की जो छवि हमारे सामने निकल कर आती है उससे यह साबित होता है कि वह बहुत ही घमंडी जाहिल और जिद्दी किस्म का प्राणी है.

कैसे आइये देखते हैं-

कुरान में वो बार बार एक बात कहता है कि हमने कायनात को 6 दिनों में बनाया लेकिन कायनात के बनने से पहले ये 6 दिन उसने कैसे डिसाइड किये पता नहीं ? इससे साबित होता है कि वो जाहिल है या दूसरों को बेवकूफ बना रहा है या अल्लाह का ये दावा अल्लाह के नाम पर किसी धूर्त इंसान की चालबाजी के सिवा और कुछ नही है.

कुरान में अल्लाह बता रहा है कि उसने इंसानों को क्यों बनाया ? अल्लाह ने इंसानों और जिन्नों को सिर्फ इसलिए पैदा किया ताकि दोनों उसके आगे गिड़गिड़ाते रहे 7/94

अल्लाह की इस बयानबाजी से मालूम होता है कि यदि अल्लाह है तो वह कितना क्रूर प्राणी है उसे इंसानी जिंदगी की दुश्वारियों से कोई मतलब नहीं इंसान द्वारा इंसान का शोषण या बालात्कार होता रहे वो देखता रहेगा क्योंकि उसे बस इतनी चिंता है कि लोग उसके आगे गिड़गिड़ाते रहें बस और आज तक जिन्न नाम का कोई प्राणी भी साबित नही हुआ फिर कैसे माने की यह बात कायनात को बनाने वाले किसी अल्लाह ने बकी हैं ? जैसे जिन्न का वजूद सिर्फ फर्जीवाड़ा है वैसे ही अल्लाह का आस्तित्व भी गप्पबाजी के सिवा कुछ नहीं दोनों फर्जी केरेक्टर किसी एक आदमी के दिमाग की उपज भर हैं.


किसी फर्जी किताब की इन मनगढ़ंत बकवासों के आधार पर जब हम यह मान लेते हैं अल्लाह ने कायनात बनाई तो सवाल पैदा होता है कि यूनिवर्स के बनाने से पहले अल्लाह कहाँ था और क्या कर रहा था ? 

कुल्हु अल्लाहु अहद....

यानी उसे किसी ने पैदा नही किया ? इसका अर्थ यह है कि एक समय ऐसा भी था जब अल्लाह तो था लेकिन कायनात का वजूद नही था यानी वह शून्य में कहीं तन्हा अकेला अटका हुआ था लेकिन जब हम अल्लाह की किताब में अल्लाह के इतिहास को खंगालते है तो पता चलता है कि सृष्टि को बनाने से पहले उसका सिंहासन पानी पर था 11/7 यानी कि आसमान और जमीन के क्रिएशन से पहले हाइड्रोजन ऑक्सीजन ग्रेविटी और स्पेस वजूद में थे.

अब सवाल यह है कि इन तत्वों को किसने बनाया ? यदि हम इस गप्पबाजी पर यकीन कर लें कि कायनात के बनाने से पहले अल्लाह का सिंहासन पानी पर था इसका अर्थ है कि अल्लाह की ही तरह पानी भी कायनात से पहले मौजूद थी ? और पानी बिना स्पेस के तो एसिस्ट करेगी नहीं इसका अर्थ है कि स्पेस भी पहले से मौजूद था पानी के ऊपर अल्लाह के सिंहासन को स्थिर रखने के लिए ग्रेविटी की भी जरूरत होगी तो इसका अर्थ यह हुआ कि अल्लाह के साथ ही हाइड्रोजन ऑक्सीजन ग्रेविटी स्पेस और टाइम यह सभी तत्व भी कायनात बनने के पहले से मौजूद थे.

तो फिर अल्लाह ने क्या बनाया ? 

अल्लाह ने जमीन बिछाई और सात आसमान बनाये और पहाड़ों को ऊपर से गाड़ दिए ताकि वह इंसानों को लेकर लुढ़क न जाये ? यह क्या बकवास है ? 

दरअसल अल्लाह ने कुछ नही बनाया लेकिन अल्लाह के नाम पर धूर्तों ने हमें बेवकूफ जरूर बनाया तर्क की कसौटी पर अल्लाह नाम का कोई प्राणी साबित नहीं होता यह इंसानी भ्रम के सिवा और कुछ भी नही जब हम सदियों पुरानी अल्लाह मियां की गप्पबाजी पर यकीन कर लेते हैं तो अल्लाह का दिमागी वाइरस अपना काम शुरू कर देता है फिर उसकी किताब प्रासंगिक हो जाती है और उसमें लिखी जहालत भरी इबारतें इक्कीसवी सदी के इंसान को 14 सदी पीछे ले जाकर अरब के रेगिस्तानों में भटकाना शुरू कर देती हैं यह सब सिर्फ इसलिए होता है कि हम अपनी कुंठाओं को सच मानकर इससे अलग कुछ जानना ही नहीं चाहते. 

एक कौम के रूप में मुस्लिम की बड़ी आबादी आज भी वक्त में 14 सदी पीछे जी रही है यह सब सिर्फ और सिर्फ इसलिए की उसे भ्रम है की यह कायनात उसके अल्लाह ने बनाई. 

इस कौम के जिंदा नौजवानों पर यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे अपने समाज को इस कोरानीक वायरस से निजात दिलाएं वर्ना दुनिया दूसरे प्लेनेट्स तक पहुंच जाएगी और आपकी आने वाली पीढियां अरब के रेगिस्तानों में भटकती रहेंगी.

-शकील प्रेम



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