जो कौड़ियों के भाव बिकती है - तर्कशील भारत

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Monday, November 2, 2020

जो कौड़ियों के भाव बिकती है

 एक आसमानी किताब

जो जमीन पर 

30 में बिकती है

असल प्रॉब्लम 

यहीं से शुरू होती है

सिवा अल्लाह के 

कोई पूजनीय नहीं

तो मत पूजो 

लेकिन 

जो अल्लाह के सिवा 

किसी और को पूजते हैं 

उनका दोष क्या है ?


अगर अल्लाह के सिवा 

सारे माबूद झूठे हैं तब

अल्लाह ही सच्चा है

यह कौन साबित करेगा ?


वह आसमानी किताब

जो 30 रुपये में

जमीन पर बिकती है ?


अजीब पागलपन है !!


जिसने कायनात बनाई

दो दिन में जमीन बिछाई

सात आसमान बनाये

आदम और सुलेमान बनाये

उस अल्लाह का वजूद

न मक्का में न गेहूं में

न धनिया में न पुदीना में

उस अल्लाह का सबूत

धरती पर कहीं नहीं

चांद पर भी नहीं

मार्स ज्यूपिटर वीनस पर भी नहीं

न आकाशगंगा के कोने में

न एंड्रोमिडा के होने में,


अल्लाह का सुबूत

30 रुपये की दर से

मार्किट में बेची जा रही

उस किताब में दर्ज है

जो कहती की

इसे जो मानता है वही लायक है

बाकी सब नालायक हैं

और इसी 30 रुपये की किताब में

अल्लाह दावा करता है कि

हाड़ मांस का एक आदमी

जो गदही का पैसेंजर था 

वही आखिरी मैसेंजर था

जिसके तार आसमान से जुड़े थे

जिसके पास फरिश्ते उतरते थे

जिसने चांद को कतर दिया था

आसमानों का सफर किया था


यह सभी बातें

30 रुपये की दर से

जमीन पर बेची जा रही

उस आसमानी किताब में दर्ज है

जिसके सही होने का 

दावा अल्लाह करता है

और अल्लाह के होने का सुबूत

उसी आसमानी किताब में है

जो जमीन पर

30 रुपये में मिल जाती है.


अजीब कन्फ्यूजन है.


अब सवाल यह है कि

30 रुपये की 

इस किताब के सही होने का

और इस किताब में दर्ज 

अल्लाह के सही होने का 

गवाह कौन है ?


गवाह है न !!


वह सख्श 

जिसकी छवि साफ सुथरी थी

जिसके पास 

आसमान से यह किताब उतरी थी

जिसे लेकर जिब्रील आया था

जिसने इकरा का गीत गाया था


अजीब कन्फ्यूजन है


लेकिन उस आदमी के सही होने की 

गारंटी कौन लेगा ?

जो 1400 साल पहले मर चुका है ?


यह गारंटी अल्लाह के पास है

और अल्लाह का सुबूत

उस आसमानी किताब में दर्ज है

जो 30 रुपये की दर से

जमीन पर बिकती है

यह किताब 

दुनिया का सारा इल्म रखती है 

यह दावा भी अल्लाह करता है 

और अल्लाह के होने का सबूत 

उसी आसमानी किताब में दर्ज है

जो 30 रुपये की दर पर 

मार्किट में बिकती है.


अजीब कन्फ्यूजन है

यह तो कोई बात नहीं हुई


मानना है मानो वर्ना भाड़ में जाओ

हमारा दीन सच्चा है हमारी किताब सच्ची है

हमारे रसूल आखिरी मैसेंजर हैं

और इस्लाम हक है 

यह सब अल्लाह ही बेहतर जानता है


ठीक है भाई

अब मैं समझ गया

आपकी यह सभी बातें 

अल्लाह ही बेहतर जानता है

जिसके होने का सुबूत 

उस आसमानी किताब में दर्ज है

जो जमीन पर 

कौड़ियों के भाव बिकती है.


है न !! 


-शकील प्रेम




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