पुरुष दिवस - तर्कशील भारत

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Thursday, November 19, 2020

पुरुष दिवस

 सुना है 

आज पुरुष दिवस है ?

और मैं पुरुष हूँ

तो मुझे

आज के दिन 

खुद पर

गुमान करना चाहिए 


पुरुष होने का गुमान

पति होने का गुमान

बाप होने का गुमान

भाई होने का गुमान

बेटा होने का गुमान

कमाने का गुमान

मालिक होने का गुमान

इतने सारे गुमान

सिर्फ इसलिए

क्योंकि मैं पुरुष हूँ ?


और 

यह सभी गुमान मिलकर

जब मेरा अभिमान बन जाते हैं

तब मैं

बीबी को पीट सकता हूँ

बेटी को इश्क की सजा दे सकता हूँ

ऑनर के नाम पर किलिंग कर सकता हूँ

यह मेरा अभिमान ही है कि

शादी के नाम पर 

रेप करने की खुली छूट है मुझे

दौलत के दम पर

रखैल रखने की आजादी है मुझे

लड़की को छेड़ सकता हूँ

एसिड फेंक सकता हूँ,


माफ कीजियेगा

मैं पुरुष हूँ

लेकिन इस बात का

मुझे कोई गुमान नहीं

और न ही 

मुझे रत्तीभर 

इस बात का अभिमान है

की मैं पुरुष हूँ


मेरे लिए इसमे 

गुमान वाली कोई बात ही नही

की मैं पुरुष हूँ

इसलिए 

आज के इस 

तथाकथित शौर्य दिवस की बधाई 

मैं नही लूँगा


हाँ

मैं उस दिन 

पुरुष दिवस को 

सेलिब्रेट जरूर कर सकता हूँ

जिस दिन  

बालात्कार एसिड अटैक 

घरेलू हिंसा और वैश्यावृत्ति

का दंश 

पुरुष कौम भी झेलना शुरू करे 

या इन सभी मे

पुरुषों की भी

बराबर की हिस्सेदारी हो


या हम सब मिलकर

पुरुषों पर लगे इस कलंक को

पूरी तरह खत्म कर दें


उस दिन 

महिला दिवस को

हम सभी पुरुष मिलकर मनाएंगे


और पुरुष दिवस को

सारी महिलाएं सेलिब्रेट करेंगी


-शकील प्रेम

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