कार्टून के लिए कार्टून मत बनो - तर्कशील भारत

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Monday, November 2, 2020

कार्टून के लिए कार्टून मत बनो

 तुम 

फ्रांस में 

रहो या इटली में

कैनेडा में बस जाओ 

या सिडनी में

तुम 

हर जगह 

"मक्का" 

क्यों उगाना चाहते हो ?


जर्मनी में रहो

या नीदरलैंड में

स्वीडन में बस जाओ

या ग्रीनलैंड में

तुम 

हर पेड़ पर

"खजूर" 

ही क्यों देखना चाहते हो ?


नॉर्वे में रहो या

मोरिसस में

फिनलैंड में रहो

या टेक्सस में

हर दीवार पर

सफेद

रंग ही क्यों पोतना चाहते हो


दुनिया चांद पर

आलू उगा रही है

लेकिन तुम

जमीन के हर हिस्से पर

"पुदीना" 

ही क्यों बोना चाहते हो ?


औरतों के लिए

दुनिया ने खोल दिये

दरवाजे आसमान के

तुम अपना 

"लिफाफा"

बन्द ही क्यों रखना चाहते हो ?


जिन गर्दनों को बनने में

लगे हैं 4 अरब साल

उन्हें एक झटके में 

तुम 

क्यों उड़ा देना चाहते हो ?


दुनिया 

तुम्हारे खिलाफ नहीं

बल्कि

तुम्हारी सोच 

वक्त के खिलाफ है

तुम्हारे उलेमा

तुम्हे अपनी दो कौड़ी की 

सड़ी गली घटिया 

जिद पर

"आउटडेट" रखते हैं

और

तुम

उसी घटिया 

"जिद" 

की वजह से

"फ्रस्टेट" हो जाते हो.


"कार्टून" के लिए 

कार्टून मत बनो

इंसानियत के लिए 

बस

इंसान बन जाओ

इंसानियत के लिए 

बस

इंसान बन जाओ.


-शकील प्रेम



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