मेरे पास अपना कुछ भी तो नही - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Friday, August 7, 2020

मेरे पास अपना कुछ भी तो नही

 


मेरे पास अपना कुछ नही है

सोच समझ और जानकारियां

इनमे से कुछ भी मेरा नही

विचार संस्कार और ज्ञान 

सब दूसरों का उधार है

अपना कुछ है तो वो है 

चंद सपने

थोड़े से ख्वाब 

और

मुट्ठी भर संवेदनाएं 

मैं इन्ही चंद सपनों और

अपनी मुट्ठी भर 

संवेदनाओं के बल पर 

इंसानियत की बातें करता हूँ 

और चाहता हूँ 

दुनिया मेरी तरह सोचने लगे 

मेरे नजरिये से देखने लगे 

मेरी तरह बन जाये 

लेकिन 

मुझे ये भी पता है कि 

ऐसा नही होगा 

क्योंकि 

दुनिया मुझसे बहुत आगे है 

मुझसे बहुत आगे सोचती है 

वो मेरी तरह क्यों बनेगी ? 

मेरा अपना कोई स्तर ही नही 

तब 

मैं दुनिया को 

किस स्तर पर ले जाना चाहता हूँ ? 

ये मेरा वहम है 

या 

मेरा पाखंड है 

दुविधा में हूँ 

लेकिन इतना जानता हूँ कि 

मैं पाखंडी नही हो सकता.


मेरे पास अपना कुछ नही है

ये सांसे ये नाम 

और मेरा वजूद भी

किसी और कि मेहरबानी है

तब मेरा अपना क्या है ?

कुछ भी तो नही

जो भौतिक हैं वो मेरा नही

फिर मेरा क्या है ?

पता नही

लेकिन इतना जानता हूँ कि

जो उधार है 

उसे चुकाकर जाना है

जो लिया है उसे देकर जाना है 

और जो

हासिल किया है

उसे लौटाना भी है.


मैं नही चाहता 

कि पूरी दुनिया मेरी तरह सोचे

मैं ये भी नही चाहता कि 

दुनिया पर नास्तिक ही राज करें

मैं यह भी नही चाहता कि 

ईश्वर अल्लाह गॉड की

अवधारणाएं समाप्त हो जाएं

मैं बस इतना चाहता हूँ कि

हम मानवता को ठीक से समझ जाएं

संवेदनाओं के अथाह समुद्र में गोता लगाएं

सत्य की इमारत में नीवं का पत्थर बन जाएं 

मामूली ही सही मगर औरों के लिए चिराग बन जाएं

खुद को जलाकर दुनिया को रोशन कर जाएं

जिन्हें परोपकार करना है बेशक वे महान बन जाएं

आओ हम इंसान बन जाये आओ इंसान बन जाएं


-शकील प्रेम

No comments:

Post a Comment

Pages