जली नही वो बाती हूँ - तर्कशील भारत

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Sunday, August 2, 2020

जली नही वो बाती हूँ


जली नही वो बाती हूँ
तेरा कर्ज मैं चुकाती हूँ
जिसे देख कर तू डर जाए
तुझे वो आईना दिखाती हूँ
आकर देख ले तू बुजदिल
मैं फिर तुझे बुलाती हूँ 
एक बार ही जली थी मैं
तुझे रोज मैं जलाती हूँ
तू भटक गया था पगले
आ मैं रास्ता दिखाती हूँ
जो धर्म न सिखा पाया
वो पाठ मैं पढ़ाती हूँ
तेरी मर्दानगी मर जाती है 
जब जब मैं मुस्कुराती हूँ

-शकील प्रेम


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