"बुजरी" भोजपुरी की इस गाली के पीछे का रहस्य - तर्कशील भारत

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Wednesday, July 15, 2020

"बुजरी" भोजपुरी की इस गाली के पीछे का रहस्य


वैसे तो हर भारतीय भाषा में औरतों के लिए थोक के भाव में गालियां उपलब्ध हैं लेकिन मैं यहां भोजपुरी की बात कर रहा हूँ जिसमे एक बहुत ही खास तरह की गाली है जिसका इस्तेमाल सभी बिहारी मर्द अपने घरों में कभी न कभी तो करते ही हैं इन मर्दों में वो नन्हें मर्द भी शामिल हैं जो अभी बोलना सीख रहे हैं (यानी की बच्चे) और वो गाली है "बुजरी"

मेरे इलाके में (चंपारण) तो यह गाली बिल्कुल आम है खासकर दलित समाज में, यहां तक की छोटा सा बच्चा अपनी माँ से लतियाये जाने पर रोते हुए उसे गुस्से में "बुजरी" कहता है और घरवाले उस बच्चे के इस टेलेंट पर गौरवान्वित भी होते हैं.

जब आप इस गाली के अर्थ को और इसके दर्शन को समझेंगे तो आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे. बुजरी असल में दो शब्दों से मिलकर बना है "बूर" और "जरी" भोजपुरी भाषा में महिला यौनांग को "बूर" कहा जाता है और "जरी" मतलब जली हुई. 

जैसे आज भी हम देखते हैं खासकर बिहार में की डायन होने के शक में दलित औरतों के साथ वहशीपन की हद पार की जाती है वैसे ही सौ साल पहले तक जिन औरतों के चरित्र पर शक होता था या जो अभागी स्त्रियाँ चरित्रहीनता के आरोप में पकड़ी जाती थी उनके यौनांग में जलती हुई लकड़ी ठूस दी जाती थी जिससे उनका यौनांग जल जाता था (यानी "बूर" "जर" जाता था) इन्ही को "बुजरी" यानी की "बूर" "जरी" कहा जाता था. यह अमानवीय कृत्य खासकर दलित वर्ग की महिलाओं के साथ ही होता था.

इस अत्याचार की शिकार होने वाली ज्यादातर औरते अपने जीवन में सेक्स से वंचित तो होती ही थीं जीवन भर सामाजिक तिरस्कार झेलती थी वो अलग.

कई बार जानबूझकर भी किसी औरत को इस तरह का इल्जाम लगाकर "बुजरी" कर दिया जाता था.

महिलाधिकार और नारिसम्मान की बकैती करने वाली फेसबुकिया महिलाओं को फुर्सत निकालकर धरातल पर भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहाँ उनकी ज्यादा जरूरत है.

-शकील प्रेम

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