मुस्लिम युवाओं के नाम संदेश - तर्कशील भारत

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Friday, July 24, 2020

मुस्लिम युवाओं के नाम संदेश


बहुत से मुस्लिम युवा मुझे संदेश भेजते हैं की वे मेरी videos की वजह से वे बदल गये हैं वे दावा करते हैं की अब वे मुसलमान नही बल्कि इंसान बनने की प्रक्रिया में मेरे साथ हो लिए हैं यह मेरे लिए गर्व का विषय है लेकिन मैं यह तब मानूंगा जब आप पाखण्डवाद के खिलाफ मुखर होकर आवाज बुलन्द करेंगे और इसकी शुरुआत अपने समाज से करेंगे. 

यदि आप चाहते हैं की सच में मानवता का युग स्थापित हो तो आपको सबसे पहले अपने समाज की दकियानूसी सोच रूढ़ियों और धार्मिक आडंबरों के विरुद्ध लड़ना होगा सम्भव है की इस लड़ाई में आप बहुत कुछ खो देंगे लेकिन इसके बदले में आपकी भावी पीढ़ियों को बहुत कुछ हासिल होगा. वे उस नई दुनिया में जियेंगे जहां सिर्फ इंसान बसते हों.

और इस नई दुनिया की शुरुआत तभी सम्भव है जब धार्मिक कट्टरपंथ/जहालत का अंत हो और यह तभी होगा जब आप और हम आज धरातल पर इस ओर मेहनत करेंगे.

किसी भी समाज की उन्नति में धार्मिक अन्धविश्वाश सबसे बड़ी रुकावट होते हैं और जब तक हम इन धार्मिक ढकोसलों को तरजीह देते रहेंगे तब तक समाज की तरक्की सम्भव नही है इसलिए अन्धविश्वाशों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक युवा का पहला कर्तव्य होना चाहिए क्योंकि युवा ही बदलाव लाता है नौजवान ही क्रांति करता है सती प्रथा बाल विवाह दासप्रथा बलि प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को उस दौर के युवाओं ने ही दूर किया था युवा होने का अर्थ भी यही है की आप समाज को नई दिशा देने की खातिर संघर्ष करें.

तो आइये मेरे साथ सत्य प्रेम और परिवर्तन की इस लड़ाई में मेरा साथ दीजिये. इस बार मेरे अनुरोध पर तकरीबन 150  मुस्लिम युवाओं ने अपने घरों में कुर्बानी नही करने का प्रण लिया है और साथ ही उन्होंने वादा किया है की वे समाज में जाकर लोगों को इस बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे.

आप भी इस नेक काम का हिस्सा बनें यह संदेश खासकर मुस्लिम परिवारों में जन्में युवाओं के लिए है आप अपने घर से पड़ोस से रिश्तेदारों के यहां जाकर उन्हें कुर्बानी से रोकने का प्रयत्न करें उन्हें समझाएं की यह पागलपन है अन्धविश्वाश है.

यदि आपके समझने से कुछ लोग इस बुराई से तौबा करते हैं तो यह आपकी जीत है और अगर न मानें तो उनसे लड़ें नहीं जाने दें लेकिन अपनी बात उन तक पहुंचाएं जरूर. शायद इस साल वे न मानें लेकिन मुझे यकीन है की अगले वर्ष तक आपकी यह मेहनत रंग जरूर लाएगी.

हर साल की तरह इस बार भी बकरीद के नाम पर करोड़ों बेजुबान जानवरों का कत्लेआम होगा आप इस सम्पूर्ण सर्वनाश को रोक नही सकते लेकिन कुछ लोगों को तो इस पाखंड से दूर कर ही सकते हैं आप युवा हैं यदि आज आप धार्मिक बुराइयों के खिलाफ नही उठेंगे तो यह समाज कभी नही जागेगा क्रांति तभी आएगी जब आप इसके लिए लड़ना शुरू करेंगे.

यह ध्यान रखिये की समाज को बदलने के लिए आसमान से कोई एलियन नही आएगा आपको और हमें ही अपने अंदर के युगपुरुष को बाहर निकालना होगा और अपने हिस्से की क्रांति खुद करनी होगी तो इंतजार मत कीजिये बल्कि शुरुआत कीजिये.

-शकील प्रेम

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