जन्नत की हूरें - तर्कशील भारत

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Monday, July 6, 2020

जन्नत की हूरें

लोगों को यह समझाने के लिए की मैं ही अल्लाह हूँ जब तमाम तरह की जुमलेबाजी फेल हो गई तो अल्लाह को किस तरह के मनोविज्ञान का सहारा लेना पड़ा ? देख लीजिए.

52अत-तूर (At-Tur):20 - - जन्नत में पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे

55अर-रहमान (Ar-Rahman):56 - उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):17 - उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे,

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):18 - प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):22 - और बड़ी आँखोंवाली हूरें,

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):35 - (और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया 36और हमने उन्हें कुंआरी बनाया

पूरी दुनिया का इतिहास उठा कर देख लीजिये कोई भी धार्मिक ग्रंथ इंसान को इंसानियत नही सिखा पाया वेद कुरान बाइबिल गीता रामायण ये सभी ग्रंथ इतिहास के षड्यंत्रकारी इंसानों ने ही लिखें हैं इसलिए ये सभी ग्रन्थ आज की दुनिया के लिए साहित्यिक कचरे से ज्यादा की औकात नही रखते.भगत सिंह ने लिखा था की "धर्म इंसान को गुलाम बनाये रखने का सबसे पुराना षड्यंत्र है इसलिए प्रत्येक नौजवान जो क्रांति चाहता है उसे धर्म की आलोचना करनी होगी धर्मग्रंथों की मान्यता रद्द करनी होगी और ईश्वर पर आधारित व्यवस्था को नष्ट करना होगा तभी कुछ परिवर्तन सम्भव है वर्ना सब व्यर्थ है.

कुरान को आसमानी किताब मानने वाले भक्तों को इस आयत पर भी गौर करना चाहिए जो कुरान की सबसे पवित्र और सच्ची आयत है.

74अल-मुद्दस्सिर (Al-Muddaththir):25 - "यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है"

46अल-अहकाफ (Al-'Ahqaf):8 - "जिसे इसने स्वयं ही गढ़ लिया है" 

-शकील प्रेम

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