कुर्बानी के नाम पर पाखण्डवाद कब तक ? - तर्कशील भारत

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Thursday, July 23, 2020

कुर्बानी के नाम पर पाखण्डवाद कब तक ?


मैं शाकाहारी हूँ लेकिन मुझे आपके मांसाहारी होने से कोई दिक्कत नही आप क्या खाते हैं क्या पहनते हैं यह आपका व्यक्तिगत मामला है लेकिन धर्म के नाम पर आप जो तमाशा करते हैं वो सही नही हैं तीन दिन की कुर्बानी में करोड़ों पशुओं की सामूहिक हत्याओं को आप मजहब का हिस्सा मान कर इतरा सकते हैं लेकिन मैं आपकी इस क्रूरतापूर्ण जहालत को हैवानियत का नाम देता हूँ यह अमानवीय कुकृत्य है जिसे रोका जाना चाहिए इस मामले में आपकी वाहियात दलीलों को मैं अपने पैरों तले रौंदता हूँ.

जिस कौम की 80 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे हो क्या उस कौम को इस तरह की खर्चीली और निर्दयी आदतों से तौबा नही करना चाहिए ? क्या आप जानते हैं की बकरीद के नाम पर हर साल तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मांस चट कर जाते हैं आप ? वो भी सिर्फ तीन दिनों में.

कभी सोचा है की 20 हजार करोड़ से आप हर साल कितने स्कूल कालेज हॉस्पिटल यूनिवर्सिटिज बना सकते हैं ? जहां आपके बच्चे पढ़ सकें आपका इलाज हो सके, इन रुपयों से हर साल सैंकड़ों फैक्टरियां खोली जा सकती हैं ताकि कोई असलम फारुख सड़क किनारे पंचर लगाने को मजबूर न हो. कोई शबाना या कोई फुरकाना कोठों तक न पहुंचे. कोई बदरुद्दीन चाचा बुढ़ापे में भीख न मांगे और कोई अनवरी खाला किसी के घर के बर्तन न साफ करे. लेकिन आपको इनमे से किसी से कोई हमदर्दी नहीं, कोई मरे जिये आपको क्या ?

आपका असली दुश्मन कोई और नही है बल्कि आपकी यही जाहिलाना सोच है साथ ही वो लोग हैं जिन्हें आप अपना रहनुमा मानते हैं क्योंकि वे आपको कट्टर बनाने पर तुले हैं दीन के नाम पर आपकी जाहिलियत को उभारने में सबसे बड़ा हाथ आपके इन्ही नालायक रहनुमाओं का है जो कौम के नाम पर बड़ी बड़ी तकरीरें तो करते हैं और उसी कौम को पाखण्डों के गड्ढे में धकेलते चले जाते हैं. ध्यान रखिये की जब कोई कौम धर्म के नाम पर अंधी हो जाती है तब उसका पतन निश्चित हो जाता है और तब उस कौम की बर्बादी को कोई नही रोक सकता.

आपके रहनुमा ही आपको कट्टर बनाते हैं ऐसा वे इसलिए करते हैं क्योंकि आपकी जहालत पर उनकी हरामखोरी टिकी हुई है कभी ओबैसी साहब ने आपको बताया की कुर्बानी न करो इसे अपने बच्चों की एजुकेशन में खर्च करो या किसी गरीब के बच्चे की पढ़ाई का इंतजाम करवा दो. नही न !! बल्कि वो तो खुद हर बकरीद को 50 बकरों को कटवा कर आपको यह संदेश देता है की देखो कुर्बानी कितनी जरूरी है ? यही लोग आपकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण है.

"पुलसिरात" की चिंता छोड़ कर कौम की सूरत पर ध्यान दीजिये वर्ना कुछ बचेगा नहीं और कोई बचाने वाला भी नही आएगा.

-शकील प्रेम

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