इस्लामिक कट्टरपंथ की शिकार हाजिया सोफिया - तर्कशील भारत

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Sunday, July 12, 2020

इस्लामिक कट्टरपंथ की शिकार हाजिया सोफिया

हाजिया सोफ़िया को बचा लीजिये

इस्लाम की सबसे बड़ी दिक्कत यही है की यह बिल्कुल भी सेक्युलर नही है इसलिए इस्लामिक मुल्कों में सेक्युलर या लिबरल होना एक गाली जैसा है लंबे संघर्ष के बाद तुर्की गणतंत्र बना था कमाल अतातुर्क पाशा ने सेक्युलरिज्म की बुनियाद पर ही नए तुर्की की नींव डाली थी जिसमे सभी धर्मों के लिए बराबर जगह थी इसी आधार पर कमाल अतातुर्क ने हाजिया सोफ़िया को म्यूजियम में तब्दील कर दिया था.

लेकिन आज 90 साल के अंदर ही तुर्की की वह सेक्युलर पहचान खत्म होने जा रही है इसकी शुरुआत हाजिया सोफिया से ही हो रही है इंसानों के कन्वर्जन से पहले इमारतों को कन्वर्ट करना जरूरी होता है क्योंकि इमारतें विरोध नही करती इमारतें जिसके कब्जे में होती हैं इनके माथे पर सिंदूर भी उसी मालिक के रंग का होना चाहिए वह तब तक ही सार्वजनिक होती हैं जब तक उनका मालिक कमजोर होता है जहां भी कट्टरपंथ हावी होता है उसकी पहली शिकार इमारतें ही होती हैं तुर्की में आज यही हो रहा है जो मेहमद द्वितीय ने 5 सौ साल पहले किया वही दोहराया जा रहा है और सनकी हुक्मरान की सनक का शिकार एक बार फिर हाजिया सोफिया हो रही है.
 
1453 तक हाजिया सोफिया पूरी दुनिया के ईसाइयों के लिए वही मकाम रखती थी जो आज मुसलमानों के लिए मदीना और यहूदियों के लिए यरुशलम का मकाम है 1453 में सुल्तान मेहमद द्वितीय ने कॉन्सटेंनटेनेपल शहर पर हमला कर इसे जीत लिया और इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया तब से लेकर 1921 तक यह ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा रही और 1935 में कमाल पाशा के हुक्म पर इसे म्यूजियम बना दिया गया कमाल अतातुर्क का यह कदम नए तुर्की की बुनियाद में मील का पत्थर साबित हुआ और पूरी दुनिया ने तुर्की के इस पहल का स्वागत किया.

लेकिन आज सौ साल बाद का तुर्की बदल चुका है आज यहां इंसानियत के ऊपर इस्लामियत हावी हो चुकी है यही असली इस्लाम है जो हर पल अतिक्रमण के फेर में रहता है तुर्की के सनकी हुक्मरानों को बाकी दुनिया से कोई मतलब नही आज उन्हें हर हाल में हाजिया सोफिया को मस्जिद में बदलना है दुनिया के तमाम ताकतवर देशों ने तुर्की के इस कदम को रोकने की कोशिश की लेकिन सब नाकाम रहे.

तुर्की के इस कदम के पीछे पाकिस्तान सहित बहुत से मुस्लिम देशों का समर्थन है ये वो मुल्क हैं जो इतिहास में जीते हैं इन्हें वर्तमान और भविष्य की कोई चिंता नही वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में भी इन्हें अपने लोगों के लिए रोजगार टेक्नॉलॉजी शिक्षा चिकित्सा या बुनियादी जरूरतों की कोई चिंता नही तुर्की और इसके समर्थक देशों के पास सुई तक बनाने की खुद की टेक्नोलॉजी नही है इसके लिए ये उन्ही देशों पर निर्भर हैं जो हाजिया सोफिया को म्यूजियम के रूप में ही बरकरार रखने की मिन्नतें कर रहे हैं.

राजनीति और धर्म का गठजोड़ हमेशा तबाहियों का कारण बनता है यही इतिहास है और जो लोग इतिहास से सबक नही लेते वे भविष्य में सदा के लिए मिट जाते हैं धर्म के नाम पर आज जो लोग तुर्की के इस नाजायज कदम का समर्थन कर रहे हैं उन्हें शायद मालूम नहीं की आज की दुनिया धर्म से नही तकनीक से चलती है और जो देश तकनीक से ऊपर धर्म को तवज्जो देते हैं वो खुद को तबाह कर लेते हैं.

अफगानिस्तान यमन सीरिया इराक ईरान के साथ ही पाकिस्तान भी अपने कट्टरपंथ की वजह से ही बर्बादी के मुहाने पर खड़ा हैं और इन्ही कट्टरपंथियों के साये में तुर्की की तबाही भी अब सामने दिखाई दे रही है.

हाजिया सोफिया को मस्जिद घोषित किये जाने के खिलाफ आवाज उठाएं.

-शकील प्रेम

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