चंगेज खान - हीरो या विलेन ? - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Saturday, July 11, 2020

चंगेज खान - हीरो या विलेन ?


चंगेज खान की क्रूरता के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है दुनिया उसे एक ऐसे क्रूर और बेरहम कातिल के रूप में याद करती है जिसने चीन से लेकर भारत तक में खून की नदियां बहा दी थी.

इतिहास के किसी भी विजेता के दो इतिहास होते हैं एक इतिहास वो जो उसके मुल्क में लिखा गया होता है दूसरा इतिहास वो जिसे उसके द्वारा जीते गये मुल्कों ने लिखा होता है एक जगह वह हीरो होता तो दूसरा इतिहास उसे विलेन साबित करने की कोशिश करता है गजनवी गौरी बाबर तैमूर नादिर शाह यह सभी आक्रांता हमारे लिए बेशक विलेन हैं लेकिन इनके अपने देश में ये सभी हीरो हैं हमारे पास इनके विलेन होने की सैंकड़ों कहानियां हैं तो अपने इलाके में इनके हीरो होने की सैंकड़ों दास्तानें मौजूद हैं.

इसमे कोई शक नही की दुनिया के लिए चंगेज खान एक निहायत ही क्रूर व्यक्ति था लेकिन मंगोलिया के लिए आज भी वह नायक ही है. चंगेज खान की तुलना हिटलर से नही हो सकती क्योंकि जर्मनी में हिटलर की कोई प्रतिमा मौजूद नही है लेकिन मंगोलिया में चंगेज खान की सैंकड़ों फिट ऊंची मूर्ति खड़ी है इससे यह साबित होता चंगेज खान आज भी मंगोलियन दिलों पर राज करता है पूरी दुनिया के साथ ही जर्मनी के लिए भी हिटलर विलेन है लेकिन मंगोलिया के लिए चंगेज खान लीजेंड ही है.

चंगेज खान ने शहर के शहर तबाह किये थे लाशों के मीनार खड़े कर दिए थे लाखों बस्तियां उजाड़ दी थीं लेकिन यह तो उस काल खण्ड के हर कबीले के लिए अपना आस्तित्व बचाये और बनाये रखने की मजबूरी का नतीजा था कबीलों का वजूद मरो या मारो के सिद्धांतों से चलता था अपने कबीले के आस्तित्व को बनाये रखने के लिए लड़ना जरूरी था जो जीतेगा वही जियेगा यह इंसानी समूहों के  "सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट" की सबसे क्रूर अवस्था का दौर था. 

चंगेज खान उर्फ तेमोजिन के कबीले के साथ दूसरे कबीलों ने क्रूरता की हदें पार की थीं उसकी बीबी बोरते को उठा ले गये जिससे वह बेइंतहा मुहब्बत करता था इतना ही नही उसके खानदान के बचे खुचे लोगों के सरों को काटकर उसका प्रदर्शन किया गया बच्चों औरतों को गुलाम बनाकर बाजारों में बेच दिया गया.

चंगेज खान बच गया उसने अपने दुश्मन के दुश्मनों को दोस्त बना कर ताकत इकट्ठी की और अगले ही साल 1203 में अपने तमाम जख्मों का हिसाब लेने के लिए उसने अपने दुश्मन पर हमला कर दिया इस हमले में उसने भी वही किया जो उस समय हर ताकतवर सरदार अपने दुश्मन कबीले के साथ करता था.

चारों ओर चीख पुकार, जलते हुए घरों से बदहवास भागते लोग जिन्हें एक एक कर कत्ल किया जा रहा था चंगेज खान के इस हमले से बचकर भागने वालों में उसकी प्यारी बीबी बोरते भी शामिल थी जिसे उसने पहचान लिया और उसे लेकर अपने कबीले पहुंचा उसे मालूम हुआ की वह 8 महीने की प्रेग्नेंट है और यह होने वाला बच्चा उसके सबसे बड़े दुश्मन का है जिसे वह तबाह कर चुका है.

उस दौर में जब नारी की औकात किसी भोगवस्तु से ज्यादा नही थी उसे जीता जा सकता था खरीदा जा सकता था जब मर्जी उसे त्यागा जा सकता था शक के आधार पर उसकी हत्या करने में कोई दोष नही था चंगेज ने अपनी बीबी को अपनाया इतना ही नही उसके गर्भ में पल रहे दुश्मन के बच्चे को भी उसने अपना नाम दिया और उसकी परवरिश अपने सगे बच्चों की तरह की और यह बच्चा आगे चलकर कई प्रान्तों का हुक्मरान भी बना.

यही चंगेज खान के जीवन का वह पहलू है जिसके आगे उसकी क्रूर छवि फीकी सी पड़ जाती है जो चंगेज खान ने बोरते के साथ किया वह अपने आप में एक मिसाल है इससे मालूम होता है की उसका कद बेशक छोटा था लेकिन उसकी सोच नहीं.

इतिहास का कोई व्यक्ति कितना सही या गलत था यह उसकी मृत्यु के सदियों बाद आज निर्णय कर पाना मुश्किल है कुछ लोग किसी ऐतिहासिक चरित्र के केवल बुरे पहलू के आधार पर उसे बुरा या उसकी कुछ अच्छी बातों के आधार पर उसे अच्छा साबित करने की कोशिश करते हैं जो की उचित नही है.

हर दौर में व्यक्ति का संघर्ष और उन संघर्षों के सिद्धांत अलग थे जो कितने सही थे या कितने गलत ? इस बात का अंतिम निर्णय कोई नही कर सकता.

-शकील प्रेम

No comments:

Post a Comment

Pages