अपना दीपक स्वयं बनिये - तर्कशील भारत

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Wednesday, July 1, 2020

अपना दीपक स्वयं बनिये

भारत में नास्तिकों की एक बड़ी संख्या तैयार हो चुकी है सर आपको नेतृत्व में आना चाहिए हम सब आपका अनुसरण करने को तैयार हैं -राहुल त्यागी, मुरादाबाद.

इस प्रेम के लिए शुक्रिया आपका राहुल सर, आपकी संवेदनाओं का सम्मान करता हूँ लेकिन मैं अपनी औकात भी जानता हूँ मुझमे नेतृत्व की क्षमता नही है इसलिए मैं समझता हूँ की जो कला आपमे न हो उससे दूर ही रहें तो बेहतर है जब कोई आदमी किसी विचारधारा की ठेकेदारी संभालने का दावा शुरू कर देता है तब वहां क्रांति की गुंजाइश खत्म और राजनीति शुरू हो जाती है आखिरकार व्यक्तिपूजा पर जा कर इस राजनीति की भी इतिश्री हो जाती है.

इतिहास में कई युगपुरुषों ने राजनीति के माध्यम से समाज को बदला लेकिन मैं उनमें से नही हूँ वे महान थे मैं तो अभी इंसान भी नहीं हूँ इसलिए मुझे विचारधारा की ठेकेदारी मत दीजिये मैं शपथ ले चुका हूँ की आजीवन चुनाव नही लड़ूंगा और किसी भी पार्टी दल अथवा संगठन में शामिल नही होऊंगा.

मैं साधारण मनुष्य हूँ मुझसे ज्यादा संभावनाएं शायद आपके अंदर मौजूद हो सकती हैं इसलिए प्रत्येक उस इंसान को जो क्रांति की इच्छा रखता है किसी अवतार के आने की प्रतीक्षा को छोड़ कर खुद के अंदर के युगपुरुष को बाहर निकालना होगा.

व्यक्तिवाद किसी भी विचारधारा के लिए घातक ही साबित होता है इसलिए मानवता के युग का ख्वाब देखने वाले तमाम जिंदादिल युवाओं को खुद के अंदर की आग को खुद से जलाकर अंधकार में प्रकाश प्रज्ज्वलित करना होगा जब असंख्य क्रांतिकारी इसी सोच पर आगे बढ़ेंगे तब कहीं कोई अंधेरा बाकी न रहेगा और तब किसी शकील प्रेम की जरूरत भी नही रहेगी.

-शकील प्रेम

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