जिंदगी है तो समस्याएं भी हैं - तर्कशील भारत

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Sunday, June 14, 2020

जिंदगी है तो समस्याएं भी हैं

हर आदमी अपनी जिंदगी की समस्यायों का समाधान ढूंढने की कोशिश करता है लेकिन जिंदगी की समस्याओं को सुलझाने के चक्कर में कुछ लोग इतने उलझ जाते हैं की उनके लिए जिंदगी खुद एक समस्या बन जाती है शायद सुशांत सिंह जैसे युवा अभिनेता के साथ भी यही हुआ होगा.

फ्रस्टेशन डिप्रेशन कर्ज या अकेलापन ज्यादातर आत्महत्याओं के पीछे यही चार सबसे बड़े कारण होते हैं लेकिन इनमें से किसी एक कारण के पीछे भी अनगिनत कारण छुपे होते हैं जो इंसान को खुद की हत्या करने पर मजबूर कर देते हैं.

कई बार परिस्थितियां ऐसी हो जाती हैं जब लगता है अब बहुत हो गया सारे दरवाजे बन्द हो चुके कोई रास्ता बचा ही नहीं और खेल खत्म. लेकिन जब तक हम जिंदा होते हैं जिंदगी का खेल जारी रहता है हमारे जीते जी सबकुछ कभी खत्म नही होता जब सारे दरवाजे बन्द हो जाते हैं तब भी कोई न कोई खिड़की जरूर खुली रहती है सारे रास्ते बन्द हो जाएं तो भी कोई न कोई पगडण्डी हमारे कदमों के इंतजार में होती है यही जिंदगी है और इस जिंदगी का खेल तो मौत के बाद ही खत्म होता है.

आपके होने से ही बहुत कुछ बदला जा सकता है लेकिन आपके नहीं होने से किसी को कोई फर्क नही पड़ता दोस्त, हां.... यह हो सकता है की आज कुछ लोग आपकी नादानी पर तरस खाकर रोएं या कुछ लोग आपकी बरसी पर आपके घर आकर रोएं लेकिन आपके नही रहने पर अंततः आपका खेल खत्म हो ही जाएगा.

आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नही है संघर्ष ही जीवन है आखिरी सांस तक लड़ते रहिए जिंदगी से भी और जिंदगी की समस्यायों से भी.

सुशांत सिंह जी को भावभीनी श्रद्धांजलि.

-शकील प्रेम

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