जिंदा होने का सुबूत दो - तर्कशील भारत

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Sunday, June 7, 2020

जिंदा होने का सुबूत दो

अगर सच में जिंदा हो तो 
अपने जिंदा होने का सुबूत दो
या
कलम को तोड़ दो
आंखों को फोड़ लो
कान बन्द रखो 
लिखो मत
सुनो मत
देखो मत
और अपनी जुबान को भी 
मर जाने दो
जियो मगर 
जिंदा लाश बनकर

अगर सच में जिंदा हो तो 
अपने जिंदा होने का सुबूत दो
और
खुल के बोलो
बिंदास लिखो
सच के रास्ते पर चलो
गलत के खिलाफ उठो

बेजुबानों की आवाज बनो
अंधों को रास्ता दिखाओ
अंधेरे का दीपक बनो
और उजाले की राह बनो

उदासियों के पीछे छुपी दस्तानों को सुनो
आंसुओं के पीछे छुपे अफसानों को महसूस करो

निशब्द न रहो
निष्पक्ष बनो
डरपोक न रहो
निर्भीक बनो
जुबान को तकलीफ दो
झूठ की तनक़ीद करो
सच की ताकीद करो
मेमनों को निर्भय करो
और भेड़ियों को भयभीत करो

जानवरों से सीखो 
और जुल्म के खिलाफ
पूरी ताकत से चीखो

चींटियों से सीखो
और निर्माण के लिए
एकजुट हो जाओ

पक्षियों से सीखो
और उड़ान के लिए
पंखों को फैला लो

अगर सच में जिंदा हो तो 
अपने जिंदा होने का सुबूत दो

-शकील प्रेम

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