हमारी अनभिज्ञता ईश्वर का प्रमाण नही है. - तर्कशील भारत

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Saturday, June 6, 2020

हमारी अनभिज्ञता ईश्वर का प्रमाण नही है.

अगर ईश्वर नहीं है तो हमारा शरीर का निर्माण एक स्वतः प्रकिया है क्या इतनी जटिल मशीन का निर्माण स्वतः संभव है सभी ब्रहमाणिय पिंड अपनी जगह पर गति के कारण स्थिर है गति की शुरुआत कैसे हुई होगी ? आप कहेगें कि विस्फोट द्वारा तो विस्फोट के लिए सबसे प्रारंभ में उर्जा कैसे उत्पन्न हुआ उसके बाद सभी पिंडों में एक निश्चित गति का होना क्या साधारण विस्फोट से संभव है ? -एक ईश्वर भक्त का प्रश्न.

उत्तर- आपकी अनभिज्ञता ईश्वर का प्रमाण नही है जिन सवालों का जवाब आज हम नही ढूंढ पाये कल उनकी परतें भी खुल जाएंगी और तब वहां से भी आपका ईश्वर रफूचक्कर हो जाएगा जब हम नही जानते थे की पृथ्वी का अंत कहाँ हैं तब आपका ईश्वर पृथ्वी के आखिरी छोर पर ही विराजमान था लेकिन अब वहां नही है.

अज्ञानता ही ईश्वर के अवसाद को पैदा करती है और इस अवसाद ने दुनिया को तबाही के सिवा कुछ नही दिया इसी ईश्वरीय भ्रम के सहारे मुट्ठी भर शातिर लोग हमें उल्लू बनाते हैं और हम उनकी फैलाई बकवासों में अपनी कीमती जिंदगी जाया कर देते हैं अल्लाह ईश्वर गॉड या यहोवा जैसी कोई चेतना यदि है भी, तो उसके लिए हम क्यों जियें ? वह आकर हमें बताये की 13 अरब 70 करोड़ साल पहले बिगबैंग मैंने किया था सब लफड़ा ही खत्म हो जाएगा.

ईश्वर पर आधारित झूठ हम पर तब हावी हो जाता है जब हम यह मान लेते हैं की हमारा किसी ने निर्माण किया है जबकि विज्ञान हमे बताता है की यूनिवर्स में कभी किसी चीज का निर्माण नही होता बल्कि विकास होता है पेड़ पौधे पहाड़ घाटियां पृथ्वी चाँद सितारे ये सब विकास की प्रक्रिया की देन हैं इन्हें किसी ने बनाया नही है जब कोई चीज बनी ही नही तो बनाने वाला कहाँ से आ गया ?

कुम्हार ने घड़े को बनाया लेकिन कुम्हार को किसी न नही  बनाया घड़े के आस्तित्व का कारण कुम्हार था और कुम्हार के आस्तित्व के पीछे उसके माँ बाप और उनके पीछे एवोल्यूशन की वह लम्बी श्रृंखला थी जो अरबों वर्षों से लगातार चल रही है यहाँ एक घटना दूसरी घटना का कारण बनती है दूसरी घटना तीसरी को जन्म दे रही है इस तरह घटनाओं की अंतहीन श्रृंखला लगातार जारी है यहां कहीं शुरुआत नही है और न ही अंत.

बिगबैंग भी किसी घटना का परिणाम होगा जिसे फिलहाल हम नही जान पाये इसका अर्थ यह कदापि नही है की हमने ईश्वर को खोज लिया है ? हमे किसी ईश्वर की जरूरत ही क्यों है ? दिल को भरमाने के लिए या खुद को बरगलाने के लिए ?

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