राष्ट्रवाद - तर्कशील भारत

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Sunday, June 21, 2020

राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद के नकली 
नारों से नफरत है मुझे
मैं सीमाओं से 
प्रेम नही करता 
जमीन पर खींची 
नकली लकीरों की खातिर
इंसानों का असली लहू बहे
यह मुझे बिल्कुल पसंद नही
मैं पृथ्वी पर
सभी इंसानों का 
बराबर हक चाहता हूँ
मैं धरती पर
सभी के लिए
संसाधनों की 
बराबर हिस्सेदारी के पक्ष में हूँ
मैं 
राष्ट्रवाद की 
बनावटी अवधारणा से ऊपर
मानवतावाद की वास्तविक 
परिकल्पना को 
स्थापित होते देखना चाहता हूँ
इसलिए 
राष्ट्रवाद के नकली नारों से
नफरत है मुझे.

-शकील प्रेम

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