आप हमेशा इस्लाम की बुराई क्यों करते हो ? - तर्कशील भारत

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Sunday, June 14, 2020

आप हमेशा इस्लाम की बुराई क्यों करते हो ?

प्रश्न- आप हमेशा इस्लाम की बुराई ही क्यों करते क्या दूसरे धर्मों में बुराई नही है या उनके खिलाफ बोलने में डर लगता है ? मैं दावे से कह सकता हूँ की तुम मुसलमान नही हो और मुझे तो लगता है की कहीं तुम आरएसएस के एजेंट तो नही हो ? इस्लाम इतना कमजोर नहीं की वो तुम जैसों की घटिया हरकतों से डर जाए बहुत आये बहुत गये लेकिन इस्लाम का कुछ न उखाड़ पाये समझे.
जहाँगीर आलम.

उत्तर- इस्लाम तो इतना कमजोर है की वह तर्क की मामूली हवा से कांपने लगता है जनाब, यदि आपका मजहब इतना ही मजबूत है तो फिर "ब्लासफेमी" के नाम पर सर तन से जुदा क्यों करते हो ? तस्लीमा नसरीन सलमान रुश्दी से तो इस्लाम का पूरा हवामहल हिल गया था जुनैद हफ़ीज आसिया बीबी और वे तमाम ब्लॉगर फ्री थिंकर्स काफी हैं यह साबित करने के लिए की इस्लाम की बुनियाद बेहद कमजोर है.

मैं मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ हूँ मुझे इस बात को प्रमाणित करने की जरूरत नही है इतना जान लीजिये की मेरे तमाम रिश्तेदार मुसलमान हैं कुछ तो देवबंद में उलेमा हैं और सिर्फ वैचारिक भिन्नता की वजह से सभी मुझसे नफरत करते हैं मुझे उनकी नफरत की कोई परवाह नही क्योंकि मैं जानता हूँ की मैं सही हूँ.

मैं मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ हूँ इसलिए मेरा फर्ज है की मैं इस्लाम नामक सदियों पुरानी "वैचारिक समस्या" के खिलाफ लड़ूँ दूसरे धर्मों में तर्क और आलोचनाओं की लम्बी परंपरा रही है लेकिन इस्लाम इससे अब तक अछूता रहा है इसलिए मैं समझता हूँ जो भी मुस्लिम युवा समाज परिवर्तन का ख्वाब देखता है उसे इस्लाम के विषवृक्ष को जड़ से मिटाने की जद्दोजहद करना होगा और यही बात दूसरे धर्मों में पैदा हुए युवाओं पर भी लागू होती है सभी अपने अपने घर के कचरे को साफ करें तो कोई समस्या बाकी न रहेगी और यही वक्त की जरूरत भी है.

एक हिन्दू को मुसलमान के घर की गंदगियों पर उंगली उठाने का अधिकार तब तक नही है जब तक वह अपने घर की गंदगियों को साफ न कर रहा हो इसी तरह एक मुस्लिम घर में पैदा हुए व्यक्ति को तब तक दूसरे धर्म की आलोचना का कोई अधिकार नही है जब तक वह इस्लाम के वैचारिक कचरे को साफ न कर रहा हो.

क्या इस्लाम की बुराइयों को उजागर करने के लिए दूसरे धर्मों की आलोचना जरूरी है ? नहीं , यहां कोई कम्पीटीशन नही चल रहा दूसरों के घर की गन्दगी देखने से आपकी गन्दगी दूर नही हो जाती सब अपने अपने घर की जिम्मेदारी स्वीकार करें तो पूरा समाज ही स्वस्थ हो जाएगा.

दूसरे की गन्दीगियों से घृणा करते रहने से आप स्वस्थ नही हो सकते इसके लिए आपको अपनी गन्दगी से नफ़रत करना होगा. 

-शकील प्रेम

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