विज्ञान भरोसे भगवान - तर्कशील भारत

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Saturday, June 13, 2020

विज्ञान भरोसे भगवान

तथाकथित ईश्र्वर के स्वयम्भू एजेंटों को देख लीजिये जो कोरोना के डर से फुलप्रूफ सुरक्षा किट में विराजमान होकर भक्तों की प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाने में लगे हैं तीनों के बीच कनेक्शन सीधा है भक्त अपनी मनोकामनाओं को डायरेक्ट ऊपर नहीं पहुंचा सकता इसके लिए उसे दलालों की जरूरत पड़ती है और धर्म के इस बाजार में तमाम तरह के दलाल मौजूद होते हैं जो हरामखोरी का यह काम बड़ी ईमानदारी से करते हैं.

इन्ही दलालों के जरिये भक्तों की अरदासें उसके मालिक तक पहुंचाई जाती हैं और इसी बीच न जाने कैसे सारे दलाल मालामाल हो जातें हैं ? हैरानी की बात तो यह की भक्ति के इस यूनिवर्सल खेल में विज्ञान का जमकर इस्तेमाल होता है. संकटमोचनों की सुरक्षा और रब्बूलआलमीन की हिफाजत आधुनिक हथियारों से लैस जवान करते हैं और इनके दलालों को कोरोना से बचाव की खातिर फुलप्रूफ किट की जरूरत होती है यहां भक्त तो भगवान भरोसे बैठा है लेकिन भगवान और उसके दलाल दोनों विज्ञान भरोसे.

भक्तों को न तो भगवान मिला और न विज्ञान, मिला तो सिर्फ घण्टा, बजाने के लिए.

भगवान और उसके दलाल दोनो मिलकर साइंस का बालात्कार करते हैं और फिर भक्तों से कहते हैं "भगवान की मर्जी के बिना तो पत्ता भी नही हिलता"

-शकील प्रेम

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