क्या हम सभ्य हो पाये ? - तर्कशील भारत

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Friday, June 5, 2020

क्या हम सभ्य हो पाये ?

दो दिन पहले ही मैं एक खबर पढ़ रहा था जिसके अनुसार मैक्सिको में हाल ही में हुई एक पुरातात्विक खुदाई में वहां 15 हजार साल पहले इंसानों द्वारा हाथी के शिकार के सुबूत मिले हैं इस महत्वपूर्ण खोज से हमें उस काल के इंसानों द्वारा शिकार के लिए बनाई गई उनकी कुशल रणनीति का पता चलता है बड़े से बड़े मैमथ का शिकार इंसान झुंड बनाकर ही करता था आगे चलकर यही इंसानी झुंड, कबीले बन गये और यही कबीले सभ्यताओं में तब्दील हुए. हजारों साल पहले झुंड और शिकार ही मनुष्य की पहचान थी क्योंकि जंगली जानवरों के बीच इंसान भी एक जानवर ही था जो धीरे धीरे सभ्यता की ओर बढ़ रहा था इस दौरान इंसानों का झुंड मैमथ के साथ साथ दूसरे इंसानी झुंडों को भी घात लगाकर मारता रहा कबीले दूसरे कबीलों को नेस्तनाबूद करते रहे और सभ्यताएं दूसरी सभ्यताओं पर जीत हासिल करती रही आज 15 हजार साल बाद भी हम झुंड ही हैं और दूसरे इंसानी झुंडों से लड़ रहे हैं जाती नस्ल और मजहब के नाम पर हमारी कबिलाई मानसिकता आज भी कायम है और राष्ट्रवाद की आड़ में सभ्यताओं का टकराव भी बदस्तूर जारी है. सभ्य होने के नाम पर हम जंगलों को लील गये नदियों को पी गये पर्यावरण को निगल गये जंगली पशुओं को आज भी हम घात लगा कर मार रहे हैं हमारी वहशियत का विस्तार और इंसानियत की गिरावट लगातार जारी है क्या हम सभ्य हो पाये ? नहीं, शायद अभी 15 हजार साल और लगें.

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