क्या कुरान आसमानी किताब है ? भाग-3 - तर्कशील भारत

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Friday, June 12, 2020

क्या कुरान आसमानी किताब है ? भाग-3

कुरान को आसमानी किताब साबित करने की फिजूल कसरत करने वाले दो तरह के लोग होते है पहली केटेगरी में जाकिर नाइक जैसे लोग होते हैं जो कुतर्कों के सहारे कुरान की आयतों को अल्लाह का कलाम साबित करने की तिकड़म करते हैं दूसरे वो पढ़े लिखे टाइप जाहिल लोग होते हैं जो जाकिर नाइक जैसों की भ्रामक बातों की चपेट में आ कर उसकी बात मान लेते हैं 

कुरान आसमानी किताब है इस कड़ी में यह मेरा तीसरा वीडियो है 

आइये हजरत साहब के दिमागी अल्लाह की कुछ और दिलचस्प दलीलों पर गौर करते हैं

जब लोगों ने कहा की 

46अल-अहकाफ (Al-'Ahqaf):8 - "उसने इसे स्वयं ही घड़ लिया है?" 

तब अल्लाह का जवाब देख लीजिये ऐ मुहम्मद जो लोग तुमसे ऐसा कहते हैं उनसे कहो की "यदि मैंने इसे स्वयं घड़ा है तो अल्लाह के विरुद्ध मेरे लिए तुम कुछ भी अधिकार नहीं रखते यदि मैंने इसे खुद गढ़ा है तो वह इसे भली-भाँति जानता है और वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह की हैसियत से काफ़ी है" 

क्या यह जवाब यूनिवर्स के पालनहार का हो सकता है ? नही बिल्कुल नही क्योंकि यहां हजरत साहब अल्लाह के नाम पर लोगों को बरगला रहे हैं जब तर्कशील लोगों ने उनकी पोल खोल दी तो सबूत पेश करने की बजाये हजरत साहब ने फिर एक आयत उतरवा दी यहां भक्त लोग कहते हैं की नबी साहब तो अनपढ़ थे क्या यह सारा प्रोपगैंडा वह अकेले रच सकते थे नही बल्कि यहां कुछ और लोग भी थे जो इस काम में हजरत साहब की मदद कर रहे थे. देख लीजिये

16अन-नह्ल (An-Nahl):103 - हमें मालूम है कि वे कहते है, "उसको तो बस एक आदमी सिखाता पढ़ाता है।" हालाँकि जिसकी ओर वे संकेत करते है उसकी भाषा विदेशी है और यह स्पष्ट अरबी भाषा है

यहां बात सलमान फ़ारसी की हो रही है जो एक पारसी था और कुरान के नाजिल होने की नौटँकी तक वह हजरत साहब के साथ ही रहा बाद में जब हजरत साहब नबी के रूप में स्थापित हो गये तो सलमान फ़ारसी भी गायब हो गया. 

इस अगली आयत पर गौर कीजिये तर्कशील लोगों के इस खुले चैलेंज को भी अल्लाह स्वीकार नही कर पाया तो धिक्कार है उस अल्लाह पर.

46अल-अहकाफ (Al-'Ahqaf):22 - उन्होंने कहा, "क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि झूठ बोलकर हमको हमारी मान्यताओं से दूर कर दे? अच्छा, तो हमपर ले आ, जिसकी तू हमें धमकी देता है, यदि तू सच्चा है"

5अल-माइदा (Al-Ma'idah):115 - अल्लाह ने कहा, जिसकी तुम बात करते हो मैं उसे तुमपर उतारूँगा, फिर उसके पश्चात तुममें से जो कोई इनकार करेगा तो मैं अवश्य उसे ऐसी यातना दूँगा जो सम्पूर्ण संसार में किसी को न दूँगा"

59अल-हश्र (Al-Hashr):21 - यदि हमने इस क़ुरआन को किसी पर्वत पर भी उतार दिया होता तो तुम अवश्य देखते कि अल्लाह के भय से वह दबा हुआ और फटा जाता है ये उदाहरण लोगों के लिए हम इसलिए पेश करते है कि वे सोच-विचार करें

लोग सोच विचार ही तो कर रहे हैं साहब तभी तो वे आपके कुतर्कों पर लगातार सवालिया निशान लगा रहे हैं वर्ना आपके दूसरे अंधभक्तों की तरह कब का दिमाग गिरवी रख दिए होते. ये तर्कशील लोग तुम्हारी असलियत जानते हैं तभी तो वे खुल कर कहते हैं की

27अन-नम्ल (An-Naml):71 - वे कहते है, "यह धमकी कब पूरी होगी, यदि तुम सच्चे हो?"

न तो फरिश्ते उतार पाये न आसमान के टुकड़े बरसा पाये जिब्रील भी छुप गया इसलिए तो अल्लाह को कहना पड़ा

67अल-मुल्क (Al-Mulk):12 - जो लोग बिना देखे अपने रब से डरते है, उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है

हो जा कहने भर से सब कुछ हो जाता हो वही अल्लाह यहां इंसानों से सहायता मांग रहा है

47मुहम्मद (Muhammad):7 - ऐ लोगों, यदि तुम अल्लाह की सहायता करोगे तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा

अब इस अगली आयत पर भी गौर कीजिये
47मुहम्मद (Muhammad):11 - अल्लाह उन लोगों का संरक्षक है जो उसके भक्त हैं जिन्होंने इनकार किया उनका कोई संरक्षक नही

अरे साहब लोगों ने इनकार इसलिए किया क्योंकि वे आपकी बकवासों से सन्तुष्ट नही हो पाये और आपके पास जुमलेबाजी के सिवा और कुछ है भी तो नही उन भक्तों पर तरस आती है जिनका संरक्षक आप जैसा फेंकूँ खुदा हो जिन्होंने इनकार किया उन्हें आप जैसे फेंकुओं की जरूरत भी नहीं अब इस आयत में भक्तों को लूटने का पूरा इंतजाम किया है खुदा ने देखिये. 

47मुहम्मद (Muhammad):38 - सुनो! यह सब हम तुमसे इसलिए बक रहे हैं क्योंकि तुम हमारे भक्त हो हम तुमसे कहते हैं की "अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करो" लेकिन तुममें से कुछ लोग है जो कंजूसी करते है हालाँकि जो कंजूसी करता है वह वास्तव में अपने आप ही से कंजूसी करता है अल्लाह किसी का मोहताज नहीं तुम्हीं मुहताज हो और यदि तुम नास्तिक हो जाओ तो वह तुम्हारी जगह दूसरा गिरोह ले आएगा और वे तुम जैसे न होंगे.

किसी ने सच कहा की लोगों को परलोक पर भरोसा दिला दो बस उसके बाद उसे लूटते चले जाओ वह उफ तक नही बोल पायेगा. यहां भी भक्तों के साथ यही तो हो रहा है. इस अगली आयत में भी लूटने का पूरा बंदोबस्त है देख लीजिये

58अल-मुजादिला (Al-Mujadila):12 - ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम रसूल से अकेले में बात करो तो अपनी गुप्त वार्ता से पहले उन्हें कुछ माल दे दिया करो दो यह तुम्हारे लिए अच्छा और अधिक पवित्र है और अगर औकात नही तो रहने दो, निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है

कुछ ही दिनों में भक्त लोग भी इस लूटमारी को समझने लगे तब फिर हजरत साहब का दिमाग चला और उन्होंने आयत बदल दी.

2अल-बक़रा (Al-Baqarah):106 - हम जिस आयत (और निशान) को भी मिटा दें या उसे भुला देते है, तो उससे बेहतर लाते है या उस जैसा दूसरा ही क्या तुम नहीं जानते हो कि अल्लाह को हर चीज़ का सामर्थ्य प्राप्त है?

अब यह आयत बदलने का खेल क्यों खेला गया इसका रहस्य इस अगली आयत से समझिये.

58अल-मुजादिला (Al-Mujadila):13 - क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले नबी को धन दो ? तुमने यह नही किया फिर भी अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो अब नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है.

आयत बदलने का राज यही था भक्तों को पहले मरने के बाद परलोक का लालच दिलाया गया फिर उनसे धन ऐंठने की कोशिश शुरू हुई लेकिन जब लोग इस बात को समझ गये तो बड़ी चालाकी आयत को बदल कर उन्हें फिर से अल्लाह की नकली रस्सी से बांध दिया गया.

अब इन आयतों पर गौर कीजिये जिस दौर में चीन में महामारी फैली थी जापान में गृहयुद्ध चल रहा था एशिया में भयंकर अफरातफरी का माहौल था उस दौर में कायनात को बनाने वाले अल्लाह को चिंता किस बात की थी वह भी देख लीजिये.

49अल-हुजुरात (Al-Hujurat):2 - ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो तुम अपनी आवाज़ों को नबी की आवाज़ से ऊँची न करो और जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे से ज़ोर से बोलते हो, उससे ऊँची आवाज़ में बात न करो कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म अकारथ हो जाएँ और तुम्हें ख़बर भी न हो

49अल-हुजुरात (Al-Hujurat):3 - वे लोग जो अल्लाह के रसूल के सामने अपनी आवाज़ों को नीची रखते है, वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँचकर चुन लिया है उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है

49अल-हुजुरात (Al-Hujurat):4 - जो लोग (ऐ नबी) तुम्हें कमरों के बाहर से पुकारते है उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते

49अल-हुजुरात (Al-Hujurat):5 -यदि वे धैर्य से काम लेते यहाँ तक कि तुम स्वयं निकलकर उनके पास आ जाते तो यह उनके लिए अच्छा होता। किन्तु अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है

24अन-नूर (An-Nur):58 - ऐ ईमान लानेवालो! जो तुम्हारी मिल्कियत में हो और तुममें जो अभी युवावस्था को नहीं पहुँचे है, उनको चाहिए कि तीन समयों में तुमसे अनुमति लेकर तुम्हारे पास आएँ: प्रभात काल की नमाज़ से पहले और जब दोपहर को तुम (आराम के लिए) अपने कपड़े उतार रखते हो और रात्रि की नमाज़ के पश्चात - ये तीन समय तुम्हारे लिए परदे के हैं। इनके पश्चात न तो तुमपर कोई गुनाह है और न उनपर। वे तुम्हारे पास अधिक चक्कर लगाते है। तुम्हारे ही कुछ अंश परस्पर कुछ अंश के पास आकर मिलते है। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्टप करता है। अल्लाह भली-भाँति जाननेवाला है, तत्वदर्शी है

इन 5 आयतों से पता चलता है की अल्लाह के नाम पर बहुत बड़ा फ्राड किया गया है जिसके सबूत उसी कुरान में मौजूद हैं जिसे तथाकथित अल्लाह की वाणी कहा जाता है इसे पढ़कर ही पता चल जाता है की कुरान के जरिये लोगों की मासूम भावनाओं से किस तरह का खिलवाड़ किया गया है और यह सब अल्लाह के नाम पर ही हुआ है.

जब लोग कहते हैं की 

50काफ (Qaf):3  "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी हो जाएँगे तो फिर हम दुबारा जीवित होकर पलटेंगे ? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है "

इसके जवाब में अल्लाह धारियों वाले आकाश की कसम खाकर कहता है 

51 अल जारिआत 6 और 7 कसम है धारियोंवाले आकाश की कर्मों का फल मिल कर रहेगा.

51 अल जारिआत 56 हमने जिन्नों और इंसानों को इसलिए पैदा किया ताकि वे मेरी इबादत करें

एक बार फिर जब लोग कहते हैं की 
52 अत-तूर (At-Tur):33 -  "उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही गढ़ लिया है?" 

इसके जवाब में सर्वशक्तिमान खुदा की दलील भी सुन लीजिये
52अत-तूर (At-Tur):34 - अच्छा यदि वे सच्चे है तो वे उस जैसी वाणी ले आएं

एक झुठा आदमी बक रहा है की मैंने गधे के सिर पर सींग देखा और लोग इस बात को नही मान रहे हैं क्योंकि वह सबूत देने में नाकाम है हठधर्मिता देखिये की वह खुद कोई ठोस दलील देने की बजाये लोगों से कह रहा है की यदि मैं झुठा हूँ तो जाओ मैंने जो भी बका है ऐसा तुम भी बक के दिखाओ 
 
अब इन आयतों पर भी गौर कीजिये लोगों को अपनी बकवासों पर यकीन दिलाने की खातिर अल्लाह किस तरह की हवाबाजी करता है.

52अत-तूर (At-Tur):35 - क्या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए ? या उन्होंने खुद से खुद को पैदा किया है ?

52अत-तूर (At-Tur):36 - या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया?

52अत-तूर (At-Tur):38 - या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे आसमान की बातें (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण

प्रमाण तो उसे देना चाहिए जो बकवासें कर रहा है लेकिन यहां तो उन लोगों से ही सुबूत मांगा जा रहा है जो अल्लाह से उसकी हवाबाजी का सुबूत मांग रहे हैं वाह गजब का रब्बुलालमिन है.

अब आगे की हवाबाजी देखिये 

52अत-तूर (At-Tur):44 - यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, "यह तो परत पर परत बादल है"

7वी सदी में अरब के लोग यह मानते थे की ऊपर कोई आसमान फैलाया गया है आसमान में कभी कभार दिखने वाले बादल उस मरुभूमि के लोगों को बड़ा हैरान कर देते थे इसलिए वे बादलों को आसमान का टुकड़ा मानते थे.

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):57 - हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते?

अब यह तो घोर जबरदस्ती वाली बात है की हमने तुम्हे पैदा किया इसलिए मुझे मानो इसी से पता चल जाता है की यहां अल्लाह के नाम पर जबरदस्ती करने वाले लोग कितने बड़े शातिर हैं.

महान अल्लाह का आगे का महान ज्ञान भी देखिये 

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):58 - तो क्या तुमने विचार किया जो चीज़ तुम टपकाते हो?

75अल-कियामह (Al-Qiyamah):37 - क्या तुम केवल टपकाए हुए वीर्य की एक बूँद न थे?

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):59 - क्या तुम उसे आकार देते हो, या हम है आकार देनेवाले?

क्या ये कायनात को बनाने वाले किसी सर्वशक्तिमान ईश्वर के शब्द हो सकते हैं ?

अब इस आयत पर गौर कीजिये या तो अल्लाह यहां सरासर झूठ बोल रहा है या फिर सबसे बड़ा धूर्त मक्कार चुगलखोर और निर्लज्ज है देखिये.

58अल-मुजादिला (Al-Mujadila):7 - क्या तुमने इसको नहीं देखा कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है कभी ऐसा नहीं होता कि तीन आदमियों की गुप्त वार्ता हो और उनके बीच चौथा वह (अल्लाह) न हो और न पाँच आदमियों की होती है जिसमें छठा वह न होता हो और न इससे कम की कोई होती है और न इससे अधिक की भी, किन्तु वह उनके साथ होता है, जहाँ कहीं भी वे हो; फिर जो कुछ भी उन्होंने किया होगा क़ियामत के दिन उससे वह उन्हें अवगत करा देगा निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है

यदि इस जुमलेबाजी को सच मानें तो दुनिया में मानवता के विरुद्ध होने वाले हर षड्यंत्र में वह शामिल रहा और सबकुछ जानते हुए भी किया कुछ नहीं औरतों की अस्मतें लुटती रहीं बच्चियों को सरे बाजार बेचा जाता बूढ़े और बच्चों की हत्याएं होती रही जनसमूहों को गुलाम बनाया जाता रहा लेकिन कायनात का सृजनकरने वाला बस चार 6 जनों के बीच की चुगलियों में मशगूल रहा वाह ऐसा खुदा यदि है तो सबसे पहले उसकी हत्या कर देना मानवता के लिए सबसे जरूरी है.

आगे देखिये-

एक तरफ वह कह रहा है की 

27अन-नम्ल (An-Naml):75 - आकाश और धरती में छिपी कोई भी चीज़ ऐसी नहीं जो एक स्पष्ट किताब में मौजूद न हो

इस जुमलेबाजी के बाद भी जब तर्कशील लोगों के तर्क लगातार जारी रहते हैं तब अल्लाह क्या जवाब देता है वह भी देख लीजिये

5अल-माइदा (Al-Ma'idah):101 - ऐ मेरे भक्तों ऐसी चीज़ों के विषय में न पूछो कि वे यदि तुम पर स्पष्ट कर दी जाएँ, तो तुम्हें बूरी लगें यदि तुम उन्हें ऐसे समय में पूछोगे, जबकि क़ुरआन अवतरित हो रहा है, तो वे तुमपर स्पष्ट कर दी जाएँगी.

जब तमाम तरह की जुमलेबाजी फेल हो गई तो अल्लाह को अलग तरह के मनोविज्ञान का सहारा लेना पड़ा अब वह लोगों के अंदर की कामवासना को टार्गेट करते हुए उन्हें किस तरह लालच दे रहा वह देख लीजिये

52अत-तूर (At-Tur):20 - - जन्नत में पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे

52 अत तूर 24 और जन्नत में उनके लिए मोती जैसे सुंदर लड़के भी उपलब्ध होंगे

55अर-रहमान (Ar-Rahman):56 - उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):17 - उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे,

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):18 - प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):22 - और बड़ी आँखोंवाली हूरें,

56अल-वाकिया (Al-Waqi`ah):35 - (और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया 36और हमने उन्हें कुंआरी बनाया

पूरी दुनिया का इतिहास उठा कर देख लीजिये कोई भी धार्मिक ग्रंथ इंसान को इंसानियत नही सिखा पाया वेद कुरान बाइबिल गीता रामायण ये सभी ग्रंथ इतिहास के षड्यंत्रकारी इंसानों ने ही लिखें हैं इसलिए ये सभी ग्रन्थ आज की दुनिया के लिए साहित्यिक कचरे से ज्यादा की औकात नही रखते.भगत सिंह ने लिखा था की "धर्म इंसान को गुलाम बनाये रखने का सबसे पुराना षड्यंत्र है इसलिए प्रत्येक नौजवान जो क्रांति चाहता है उसे धर्म की आलोचना करनी होगी धर्मग्रंथों की मान्यता रद्द करनी होगी और ईश्वर पर आधारित व्यवस्था को नष्ट करना होगा तभी कुछ परिवर्तन सम्भव है वर्ना सब व्यर्थ है.

अंत में बस इतना ही कहूंगा की कुरान को आसमानी किताब मानने वाले भक्तों को इस आयत पर भी गौर करना चाहिए जो कुरान की सबसे पवित्र और सच्ची आयत है.

74अल-मुद्दस्सिर (Al-Muddaththir):25 - "यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है"

46अल-अहकाफ (Al-'Ahqaf):8 - "जिसे इसने स्वयं ही गढ़ लिया है" 

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