पैगम्बरों की फौज किसलिये ? - तर्कशील भारत

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Monday, May 4, 2020

पैगम्बरों की फौज किसलिये ?





अल्लाह ने 6 दिनों में ये चपटी धरती बनाई और सातवें दिन आराम किया और उसके बाद उसकी शैतानी खोपड़ी में न जाने कहाँ से फरिश्ते जिन इंसान और शैतान को बनाने का शैतानी आइडिया आ गया और उसने इंसान को मिट्टी से शैतान को आग से और फरिश्तों को नूर से पैदा कर दिया फिर इन सबको आदेश दिया कि मिट्टी से बने इंसान के आगे सर झुकाएं शैतान ने बगावत कर दी और फिर असली खेल शुरू हुआ.


अल्लाह की गैरहाजिरी में शैतान ने षड्यंत्र किया और आदम को धरती पर फिकवा दिया उसके बाद पृथ्वी पर आदम और हवा ने मिलकर थोक के भाव मे इंसानों की मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर डाली.


लोगों की जमातें बड़ी होने लगी तो दुनिया को सही राह दिखलाने के लिए अल्लाह को एक आदमी की जरूरत पड़ी माफ कीजियेगा एक नही एक लाख 24 हजार आदमियों की जरूरत पड़ी नबियों की इतनी बड़ी फौज बाप रे बाप. अगर एक नबी दूसरे नबी के पीछे एक सीधी लाइन में खड़ा हो जाता तो शायद धरती के एक छोर से दूसरे छोर को छू लेता.


अफसोस की आदम से लेकर मुहम्मद तक नबियों कि इस लम्बी फेहरिश्त को तैयार होने में लाखों साल का फासला है वर्ना अल्लाह के ये नबी कोलम्बस से पहले ही दुनिया को गोल साबित कर दिए होते.


नबी आते रहे लोगों को समझाते रहे की ऊपर कोई एक बॉस बैठा है जिसके पास एक दिन सबको जाना है इसलिए केवल उसी को मानो वर्ना वो नाराज होकर तुम्हे तबाह कर देगा एक नबी की हवाई बातें ज्यादा दिनों तक कायम नही रह पातीं और हवा हवाई हो जाती फिर दूसरा नबी आता और लोगों को फिर से वही घिसी पिटी रटी रटाई बात समझाता लेकिन फिर से वही ढाक के तीन पात.


लेकिन इससे अल्लाह को कोई फर्क नही पड़ता वह बेवकूफों की तरह लगातार नबियों को भेजता रहा सिर्फ लोगों को यह समझाने के लिए की तुम सबका बॉस कोई एक ही है.


लोग इस बात को सच मानें और एक परमेश्वर की इबादत करें साथ ही उसके नबी को भी सर आंखों पर बिठायें जिसे ऊपर वाले बॉस ने उन्हें सीधे रास्ते पर चलने की ताकीद के साथ भेजा है लेकिन आम जनता थी ही इतनी कमबख्त की वो खुदा के ज्यादातर नबियों की बातों को हवाबाजी करार देती रही और उनकी तबियत से धुलाई भी करती रही न जाने कितने नबियों को तो ईश्वर के भक्तों ने मोब्लिंचिंग कर उसी परमेश्वर के पास बैरन वापस कर दिया जिसने उन्हें भेजा था फिर भी सातवे आसमान पर विरजमान उस कप्तान ने हार नही मानी और एक लाख चौबीस हजार खिलाड़ियों को मैदान में भेजता रहा.


नबूवत के इस हवाई या खुदाई टेस्ट मैच में एक नबी का विकेट गिरते ही दूसरा पवेलियन में हाजिर हो जाता कोई ठीक से बैट भी नही संभाल पाता और चला जाता कोई पहली बॉल भी नही झेल पाता कोई सिक्स के चक्कर मे आउट हो जाता और कोई कई ओवर खा कर बिना एक भी रन बनाये वापस हो लेता इस खुदाई टेस्ट मैच में चार पांच ही ऐसे प्लेयर रहे जिन्होंने ढंग से खेला और रिकॉर्ड कायम किये अब्राहम और उसके भाई ने लम्बी पारी खेली तो मूसा ने भी पूरा दम लगा दिया और विरोधी टीम के छक्के छुड़ा दिए जीसस की बारी आई तो सेंचुरी की शुरआत में ही वे इन्जरड होकर सीधे ऊपर उठा लिए गए हालांकि उनके समर्थक कहते हैं कि वे तीसरे दिन फिर से पवेलियन में लौटे थे.


इस खुदाई टेस्ट मैच में एक लाख 23 हजार 9 सौ निन्यानबे खिलाड़ियों के आउट होने के बाद आखिर में अरब का एक खिलाड़ी ऐसा आया जो इस खेल के दांव पेंच से वाकिफ था हालांकि उसके चाचा उसके इस खेल के सख्त खिलाफ थे लेकिन उसने उन्हे कह दिया कि कोई मेरे एक हाथ मे बुर्ज खलीफा और दूसरे में मिया खलीफा भी रख दे तो भी मैं इस खेल से पीछे नही हटूंगा.


शुरुआत में बहुत धुलाई हुई गालियां पड़ी पत्थर डंडे बरसे वो अलग हाथ पैर टूटे दो चार दांत शहीद हुए तब जाकर वो अपने फार्म में लौटा और तब से आखिर तक लगातार उसका स्कोर बढ़ता चला गया.


तलवार सलवार और चापलूसों की वजह से भक्तों की भीड़ बढ़ी और देखते ही देखते उस खिलाड़ी के लाखों फ़ॉलोअर्स पैदा हो गए.


बात यहीं खत्म नही हुई अरब के इस खिलाड़ी ने सबको चेता दिया था कि मैं आखिरी खिलाड़ी हूँ मेरे बाद मेरे बॉस की फैक्ट्री में नबूवत का प्रोडक्शन बन्द हो चुका है अब तो सभी को आख़िरत में मिलना है जो इस मैच के रिजल्ट का दिन होगा जहां सबके खेल का हिसाब किताब होगा.


आख़िरत के दिन से पहले इसी स्टेडियम में एक आखिरी मैच और होगा जहां दो टीमें होंगी एक मेहंदी की और दूसरी दज्जाल की इसी दज्जाल से होने वाले आखिरी मैच के लिए ऊपर बैठे बॉस की ओर से एक लाख 24 हजार नबियों का सबसे लेटेस्ट वर्जन लांच होगा जिसका नाम होगा मेहंदी और वह इसी स्टेडियम में 20 20 का मैच दज्जाल के साथ खेलेगा.


लेकिन अहमद नाम के एक शक्श ने अरब के उस खिलाड़ी के सपनों पर पानी फेर दिया पंजाब के रहने वाले अहमद ने दावा किया कि वह भी इसी खेल का हिस्सा है और वो भी ऊपर वाले बॉस की नबूवत वाले प्रोडक्शन का सबसे लेटेस्ट वर्जन है उसे भी नबी माना जाए.


अरब वाले खिलाड़ी के फ़ॉलोअर्स को यह बात हजम नही हुई और उन्होंने इसे नया खिलाड़ी मानने से साफ साफ इंकार कर दिया इस तरह दोनो आज तक एक दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं.


इस पूरे प्रसंग से मेरा कनक्लूजन यह है कि केवल यह बात कहने के लिए की मैं ही तुम्हारा रब हूँ मेरी ही इबादत करो ईश्वर को एक लाख 24 हजार नबियों को भेजने की जरूरत ही क्यों पड़ी ?


इनके अलावा 33 करोड़ देवी देवता भी लोगों को यह नही समझा पाए कि मैं ही वह ईश्वर हूँ जो निम्बू को खट्ठा मिर्च को कड़वा और गन्ने को मीठा करता है ?


भगवान ईश्वर गॉड अल्लाह खुदा यहोवा और परमेश्वर के इतने शोरगुल के बीच आजतक कोई यह साबित क्यों नही कर पाया की इनमे असली कौन है ?


कुरान बाइबल गीता वेद तौरात इंजील और रामायण मिलकर भी नही बता पाए कि इनमें सच्चा कौन है और झूठ कौन बोल रहा है ?


जिस अल्लाह को हजरत साहब के मुंहबोले बेटे की बीबी की शादी नबी से करवाने की फिक्र थी वह अल्लाह हजरत की बीबी के लिए उसकी प्रेगनेंसी के दौरान निम्बू का जुगाड़ करने वाला तो हो सकता है लेकिन वह निम्बू को खट्ठा करने वाला सर्वशक्तिमान ईश्वर नही हो सकता.


इसीलिए मैं कहता हूँ कि ये सब बकवासे उस दौर के इंसानों के लिए तो ठीक थीं जब इंसान मानता था कि धरती चपटी है आसमान बिना सहारे के कैसे टिका हुआ है धरती कछुए की पीठ पर है यहोवा आसमान के छोटे छोटे छेदों से बारिश करवाता है जिन्नात फरिश्तों की चुगलियां सुन लेते हैं तो वो धूमकेतुओं से उन पर हमला करते हैं चाँद के दो टुकड़े हो सकते है पहाड़ को एक उंगली पर उठाया जा सकता है वगैरह वगैरह.


आज के युग मे बेसिरपैर की इन सभी गप्पबाजी का कोई मतलब नही.


याद रखिये की कुछ भी सदा के लिए नही है ये चांद ये सूरज धरती पहाड़ या इंसान सबको खत्म होना है फिर डर किस बात का ?


आप आख़िरत को मानोगे तो भी एक दिन मरोगे ही और नही मानोगे तो भी मरोगे.


अगर इस झूठ को मान कर मरोगे तो जन्नत मिलेगी और नही मानोगे तो जहन्नम की आग में झोंके जाओगे इस बात की गारंटी किसके पास है ?


अगर मरने के बाद मिलने वाली जन्नत या हूरों के झूठ को सच मानकर चलते हो तब तुम्हे मरने से पहले के अपने मजहबी झूठ को सच मानना होगा.


आप कहेंगे कि इसमें क्या बुराई है तो जनाब जरा सोचिए आपके माँ बाप ने संभोग किया जिसके परिणामस्वरूप आप पैदा हुये आपकी परवरिश उस परिवेश में हुई जिसमे आगे चलकर आप हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई पारसी बौद्ध या जैन हो गए.


आप अपने पूर्वजों के मानसिक विकारों का शिकार होकर उन्ही मान्यताओं या संस्कारों के गुलाम हो गए जिसे आपके ऊपर थोपा गया था अब आप खुद के किसी भी मजहब में होने पर इतरायें या गर्व करें असल मे आप सवतन्त्र नही हैं बल्कि किसी और के विचारों के गुलाम ही हैं.


आप नमाज पढ़ें या पूजा करें चर्च जाएं गुरुद्वारे जाएं यह आपकी मानसिक गुलामी ही है जिसे आप अपना धर्म कहते हैं क्या आपको कभी कोई अल्लाह मिला ? आपके माँ बाप को कोई फरिश्ता मिला ? आपके दादा दादी को कभी किसी देवता भगवान ने साक्षात दर्शन दिए ? तो फिर क्यों आप भेड़ों की भीड़ का हिस्सा बने हुए हैं ?

1400 साल पहले कोई पैगम्बर आया था जिसने खुद कभी अल्लाह को नही देखा जिसने अल्लाह के नाम पर केवल प्रोपगंडा खड़ा किया लोग उसकी बातों को मानने लगे क्योंकि जहालत की शिकार उस भीड़ के पास ज्ञान का कोई और जरिया नही था आज उन घिसी पिटी बातों को हम आखिरी सच मान कर अपनी जिन्दगानियाँ तबाह करते चले जाएं हमारे लिए इससे बड़ी जहालत और बेवकूफी की बात और क्या हो सकती है ?


बात सिर्फ मानने की होती तो भी कोई समस्या नही थी इंसान होकर भी हम सदियों पुरानी जहालत को गधे की तरह ढोते फिरे वो भी सिर्फ इस लालच में की जन्नत में हुरे मिलेंगी या परलोक सुधर जाएगा यह हमारी मानसिक गुलामी ही तो है.


संयोग वश एक छोटी सी जिंदगी मिली है जिसमे आधी होश संभालने में बीत जाती है आधी सोने में बीत जाती है और इस कीमती जिंदगानी का एक हिस्सा बुढ़ापे में खप जाता है बाकी जो बचे उसे नमाज रोजा पूजा तीरथ या व्यर्थ के धार्मिक कर्मकांडों में स्वाहा कर दें यह जिंदगी के साथ नाइंसाफी नही तो और क्या है ?


कायनात को किसने बनाया यह सवाल धर्मों की गुलामी से कब का आजाद हो चुका है आज हमारे सामने विज्ञान ही एकमात्र साधन है जिसके द्वारा हम यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि सृष्टि कब बनी कैसे बनी और क्यों बनी ?


प्राचीन काल मे इन्ही सवालों की बुनियाद पर तमाम दर्शनशास्त्र गढ़े गए जिन्हें धर्मों ने हड़प लिया और इस खूबसूरत दर्शन की बुनियाद पर आगे चलकर अनेकों धार्मिक गिरोह खड़े हो गए.


दुनिया मे आज जो भी दुख तकलीफें हैं वह हमारी इसी जहालत की वजह से हैं क्योंकि धर्म के नाम पर ही अलग अलग गिरोह हमारी मेहनत पर हरामखोरी करते हैं और ईश्वर के नाम पर ही दुख गरीबी दमन शोषण और अन्याय को स्थाई बनाये रखते हैं यही तमाम धार्मिक गिरोह मिलकर हमारे अवचेतन में यह झूठ बिठा देते हैं कि सुख और दुख अमीरी और गरीबी सब भाग्य का खेल है इसी वजह से हमारे अंदर परिवर्तन की चाह मर जाती है और हम धर्म के अलग अलग बाड़ों में कैद संवेदनहीन पशु बन कर रह जाते हैं

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