तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा (कविता) -शकील प्रेम - तर्कशील भारत

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Monday, May 4, 2020

तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा (कविता) -शकील प्रेम

तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा (कविता) -शकील प्रेम


tarksherel bharat poem


तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


हिन्दू कोई क्रिश्चन कोई मुसलमां यहां
नही मिलता ढूंढें से भी इंसां यहां
कई हैवान छुपे हैं यहां हर तन मे
नही मिलता आदमी में इंसान यहाँ
यही सोचकर मैं हो गया हूँ गुमशुदा
यही सोचकर मैं हो गया हूँ गुमशुदा
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


मर रहा है इंसां तेरे अक़ीदों से
परेशां है हर कदम तेरे मुरीदों से
तड़प रहा है हर वक्त तेरी जुदाई में
सड़ रहा है इंसा तेरी खुदाई में
तेरे वजूद से डरना अगर जरूरी है
तब तेरा मरना बहुत जरूरी है
अब न झुकेगा सर न होगा सजदा
अब कोई नही करेगा तुझको सजदा
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


तू है तो देख ले ये खूनी मंजर
हर बगल में छुपा है तीरोख़ंजर
सब तेरे हैं और तू ही है इनका रहबर
फिर भी क्यों है सभी यूँ दर बदर
तू बता दे तेरी है क्या हसरत
क्यों खामोश है तू यूँ परवर
या बोल दे कि कुछ भी तेरे बस का नही
या मान ले कि तू किसी काम का नही
नही रोक सकता अगर जुल्मोसितम
तब तू नही है या है तो बिल्कुल बेदम
तेरे आस्तित्व को नकारता हूँ मैं सदा
तेरे वजूद को नकारता हूँ मैं सदा
तूने तो कर दिया इंसान से इंसान को जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


तेरे सच को बयां मैं करूँ कैसे 
तू नही है ये बात मैं कहूँ कैसे
तेरे नाम पर खड़ी हैं यहां दीवारें
तेरी रक्षा करती हैं नँगी तलवारें
तेरे नाम पर ही यहां बहता है लहू
तेरे नाम पर ही चलती हैं यहां सरकारें
हर शय पर तारी है गर तेरा वजूद
फिर भी नही मिलता कही तेरा सबूत
तेरे हर झूठ से उठ गया है अब पर्दा
तेरे पाखण्ड से उठ गया है अब पर्दा
तूने तो कर दिया इंसान से इंसान को जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


मासूमियत में छुपे दर्द को तू क्या जाने
उदास चेहरे की रुसवाइयों को न पहचाने
हजारों मर रहे हैं रोज तेरी हिकमत में
लाखों घायल यहां रोज तेरी रहमत में
तेरे नाम पर टुकड़े हुए जमीनों के
तेरे ही नाम पर घर भर गए कमीनो के
मन्दिर में नही तू मस्जिद में भी नही
जमीनों आसमान में तू कहीं पर भी नही
तेरे बन्दे तुझे ढूंढे कहाँ ये बता
तेरे भक्त तुझे खोजे कहाँ ये बता
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


तेरे नाम पर कायम हैं सारे दीनो धर्म
तेरे ही नाम पर है ये सारा बाजार गरम
तेरे ही नाम पर कुछ लोग कामचोर हुए
तेरे ही नाम पर कुछ लोग हरामखोर हुए
पोप पंडा मुल्ला पादरी सब झूठे
तेरे ही नाम पर हमे इन सबने लूटे
सुधारना है इंसानियत की इस नाकामी को
उतार फैंकना है इस मानसिक गुलामी को
अब इंसानियत पर तेरा बोझ न होगा लदा
अब मानवता पर तेरा भार न होगा लदा
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


हिन्दू मुसलमानों को अब जगा देंगे
ईश्वर अल्लाह गॉड को हम भगा देंगे
सारे धर्मशास्त्रों को हम जला देंगे
घृणा का आखिरी शब्द भी मिटा देंगे
सत्य की राहों को प्रेम से सजा देंगे
तब न रहेगा तू न तेरा धर्म न तेरी जात
यहीं से होगी नए युग की नई शुरुआत
जिंदा होंगी संवेदनाएं और तू होगा मुर्दा
जिंदा होगी इंसानियत और तू होगा मुर्दा
तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा
तेरी वहशत को क्या बयान करूँ ऐ खुदा

तूने तो कर दिया इंसान को इंसान से जुदा


शकील प्रेम

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