मैं तुझे नबी नही मानता (कविता) -शकील प्रेम - तर्कशील भारत

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Monday, May 4, 2020

मैं तुझे नबी नही मानता (कविता) -शकील प्रेम

tarksherel bharat poem

मैं तुझे नबी नही मानता क्योंकि
तू भी पैदा हुआ
तू भी मरा
हर वो काम 
जो इंसान करता है
तूने किया
हर वो अच्छाई 
तुझमे थी
जो इंसान में होती है
तू सादिक हुआ अमीन बना
हमदर्द हुआ रहीम बना
हर वो बुराई तुझ में थी
जो इंसान में होती है
हिंसा लूट और व्यभिचार 
शादियों के नाम पर
नाबालिग से बालात्कार 
मैं तुझे अच्छी तरह जानता हूँ
इसलिए तुझे मैं 
नबी नहीं पैगम्बर नही
इतिहास का एक नेता मानता हूँ
क्योंकि
हर वो हथकंडा तूने अपनाया
जो एक नेता अपनाता है
हर वो सपने तूने दिखाये
जो एक नेता दिखाता है
हर वो झूठ तूने बोले
जो एक नेता बोलता है
हर वो पाखण्ड तूने रचे
जो एक नेता रच सकता है
इसलिए मैं तुझे 
नबी नही मानता

तूने बुद्धिबल के दम पर
जनबल इकट्ठा किया
जनबल के साथ 
राजनीति के शिखर तक पहुंचा
भेड़ों की भीड़ को 
आसमानी रस्सियों से जोड़ा
कबीलों का बाहुबल साथ लेकर
विरोधियों का मनोबल तोड़ा
प्रचारतंत्र का इस्तेमाल तूने किया
आख़िरत का जंजाल तूने दिया
दूसरे की लकीर मिटाकर
अपना दायरा बड़ा कर लिया
पाखण्डवाद मिटाने के नाम पर
नया पाखण्डवाद खड़ा कर दिया
नियत की खोट पर डंके की चोट
तेरी अफवाहें बड़ी होती चली गई
झूठ की पुरानी बुनियादों पर 
पाखण्डों की नई इमारत 
खड़ी होती चली गई
तेरी आसमानी हवाबाजी की
जमीनी हकीकत यही है
और तेरे मजहब की ताकत 
तेरा वर्षों पुराना झूठ ही तो है
इसलिए मैं तुझे
नबी नही मानता

नेता होने के साथ 
तू छुपा हुआ खिलाड़ी निकला
हसीनाओं के रंग रूप का
तू छुपा हुआ शिकारी निकला
पुराने नियमों को तोड़ कर तूने
नए नियम बना डाले
चापलूसी के एवज में
हूरों के सपने दिखा डाले 
सेक्स की आग पर हूरों की चाह
भक्तों को हवस में चूर कर दिया
इन्ही नायाब चालों ने 
जल्द ही तुझे मशहूर कर दिया

तू खिलाड़ी और नेता ही नही
छुपा हुआ अभिनेता भी निकला
खुदा की कलाकारी के पीछे
बन्दे की अदाकारी 
क्या गजब का नाटक था ?

इस नाटक में पर्दे पर 
बस तू ही तू था
पटकथा के पीछे जो लोग थे
वो सदा पर्दे के पीछे ही रहे

इस कहानी में सामने 
बस तू ही तू था
जिब्रील फरिश्ते अल्लाह और शैतान
ये सदा तेरे पीछे ही रहे

तेरी हवाबाजी ही तेरी बाजीगरी थी
तेरी इश्कबाजी ही तेरी पैगम्बरी थी
यही तेरी असलियत है
इसलिए मैं तुझे नबी नही मानता

पाखण्डवाद की यह नौटंकी 
जिसे तूने शुरू की थी 
तेरे खलीफाओं ने पाला पोसा 
और बादशाहों ने इसे आगे बढ़ाया

आसमानी किताब के नाम
जमीनी जंगों का जो सिलसिला 
तूने शुरू किया था
उसे तेरे बाद के खलीफाओं ने पाला पोसा
और बादशाहों ने आगे बढ़ाया
इस तरह 
मजहब की यह खूनी जंग
मक्का मदीना से चलकर 
सीरिया इराक होती हुई
आगे बढ़ती चली गई 
और न जाने कितने ही
गौरी गजनवी 
ओसामा और बगदादी को 
पैदा करती चली गई
मेरी नजर में
इन सब का जिम्मेवार बस तू ही है
इसलिए मैं तुझे नबी नही मानता

अल्लाह के नाम पर 
जो फेक न्यूज़ तूने रचा था 
वो आज भी बरकरार है
आख़िरत और जन्नत की 
जो झूठी कहानी तूने गढ़ी थी 
वो आज भी असरदार है 
इसी झूठ के नाम पर
आज करोड़ों जिंदगियां 
ज्ञान विज्ञान और अपने वर्तमान को 
खोती जा रही हैं
पीढ़ी दर पीढ़ी
1400 साल पुरानी जहालत को 
ढोती जा रही हैं

गुफाओं से निकलकर
तेरे पूर्वज सामाजिक प्राणी बने थे
लेकिन तू
गुफा में घुसकर 
सामाजिक प्राणी से
पैगम्बर बन बैठा
और नेता खिलाड़ी 
शिकारी अभिनेता योद्धा
इन अलग अलग किरदारों को निभाते हुए
तू उम्मते इंसानियत का बाप बन बैठा

तेरी नियत और तेरी नीति 
तेरा नाटक और तेरी राजनीति
सब की पोल खुल चुकी है
तेरा हर दांव समझ चुका हूँ मैं
तेरी हर चाल के पीछे का राज भी
जान चुका हूँ मैं
इसलिए मैं तुझे
नबी नही मानता

मैं जान चुका हूँ की
फरिश्ते झूठे हैं शैतान झूठा है
पोथियों में लिखा हर बयान झूठा है
तेरे अहद की निशानी झूठी है
जिब्रील की कहानी झूठी है
गीता झूठी है कुरान झूठा है 
अल्लाह झूठा है भगवान झूठा है

इसलिए 
न तो मैं तुझे नबी मानता हूँ 
न ही किसी को 
मर्यादा पुरुषोत्तम 
न किसी को 
ईश्वर का जायज पुत्र मानता हूँ
और न ही किसी को 
इंसानियत का नाजायज बाप.

-शकील प्रेम

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