क्या कुरान आसमानी किताब है ? भाग-1 - तर्कशील भारत

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Wednesday, May 20, 2020

क्या कुरान आसमानी किताब है ? भाग-1


लगभग सभी धर्मों के पास उनकी आसमानी किताबें हैं और इन तमाम धर्मों का दावा है की उनकी ये किताबें सीधे आसमान से टपकी हैं और सभी धर्मों के अंधभक्त इस बात पर यकीन भी करते हैं क्योंकि उनके पास इतना समय नही की वे खुद इन आसमानी किताबों की जमीनी हकीकत को जानें इसलिए धार्मिक गिरोहों का युगों पुराना प्रोपगैंडा अनवरत जारी रहता है भक्तों की सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है की भक्ति के चक्कर में वे सवाल करने की अपनी काबिलियत खो देते हैं जिससे उन्हें मूढ़ बनाये रखने वाला गिरोह अपने मंसूबों में हमेशा कामयाबी की ओर आगे बढ़ता रहता हैं इस्लाम भी ऐसा ही एक धर्म है जो दावा करता है की उसकी कुरान भी आसमान से टपकी है लेकिन जब हम कुरान का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं की यह आसमानी तो क्या जमीनी किताब कहलाने के लायक भी नही है.

कुरान के बारे में जाकिर नाइक जैसे फर्जी लोगों ने जो फर्जीवाड़ा किया है उससे पढ़े लिखे टाइप बुद्धिहीन लोगों पर गजब का असर हुआ वे बिना तथ्यों की जांच किये मान गये की सच में कुरान आसमानी किताब है आज मैं कुरान के हवाले से ही साबित करूँगा की जाकिर नाइक फर्जी था ही साथ ही उसका अल्लाह भी फर्जी है और इन सब ने मिलकर कुरान के नाम पर सिर्फ फर्जीवाड़ा ही किया है.

सबसे पहले हम बात करेंगे उस आयत की जिसमे अल्लाह कुरान को आसमानी साबित करने के लिए पूरी मानवता को चैलेंज देता है.यूनुस (Yunus):38

अब मान लीजिये कोई आदमी दावा करता है की उसने हाथी देखा इसके लिए उस आदमी को सबूत की जरूरत नही होगी क्योंकि यह साधारण सी बात है लेकिन कोई यह कहे की उसने हाथी के बराबर का चूहा देखा तब उसे अपनी बात साबित करने के लिए दलील की जरूरत पड़ेगी दावा जितना बड़ा होगा उसे साबित करने के लिए सबूत भी उतना ही बड़ा देना होगा.

इसी तरह हजरत साहब ने भी एक दावा किया था की यह किताब कायनात को बनाने वाले अल्लाह ने भेजी है यह दावा तो बहुत बड़ा था इसलिए हजरत साहब को अपने इस दावे को साबित करने के लिए दलील भी बड़ी ही देनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने खुद सबूत पेश करने की बजाय कुरान के अल्लाह का ही सहारा लिया और हजरत साहब का यह दिमागी अल्लाह उनसे भी बड़ा जुमलेबाज निकला अपनी किताब को आसमानी साबित करने के लिए अल्लाह ने ऐसे ऐसे गजब के जुमले फेंके है की आज के बड़े बड़े जुमलेबाज भी इन जुमलों के नीचे दब के मर जाएं.

यदि तुम्हे शक हो की यह सब फर्जीवाड़ा है तो जाओ इस जैसी कुछ आयतें ही लिख लाओ

हाथी के बराबर का चूहा देखने वाले से सबूत मांगा तो उसने कहा की यदि मेरी बातों पर तुम्हे शक हो तो जाओ मैंने अब तक जो भी बका है उस जैसी दो चार लाइनें ही बक कर दिखाओ

यह गजब की जुमलेबाजी है अरे भाई आप अल्लाह हो और आप ही कहते हो 

"हमने ही आकाशों और धरती जैसी अनोखी चीज को पैदा की है इसलिए जब हम किसी काम का निर्णय करते है, तो उसके लिए बस कह देते है कि "हो जा" और वह हो जाता है.
 
2अल-बक़रा (Al-Baqarah):117 -

बस इतना सा सबूत ही तो मांगा था की यह आपकी ओर से है की नही लेकिन आपने तो पूरी एस्ट्रोनोमी समझा दी. आपको यहां यह कहने की बजाए की जाओ इस जैसी कुछ सूरह ही बना लाओ आपको कहना था हो जा और कुछ ऐसा हो जाता की लोगों की जिज्ञासाएं शांत हो जाती.

लेकिन आप ने क्या कहा इब्राहिम ('Ibrahim):19 - क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने आकाशों और धरती को सोद्देश्य पैदा किया? यदि वह चाहे तो तुम सबको ले जाए और एक नया जनसमूह ले आए

आकाश और धरती को पैदा करते समय ये लोग वहां थे जो आपकी यह कलाकारी देखते गजब का जुमला मारा है अल्लाह ने अरे चाचा लोगों को सबूत चाहिए और आप उन्हें डराए जा रहे हैं 

अल-हिज्र (Al-Hijr):9 - यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं

वो ठीक है लेकिन सुबूत कहाँ है ? की यह आपकी ओर से है ?

अल-हिज्र (Al-Hijr):10 - तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है

अल-हिज्र (Al-Hijr):11 - कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने मजाक न उड़ाया हो

जब आपको पता था की आपके रसूलों का मजाक उड़ाया जाएगा तो आप उन्हें फिजूल में क्यों भेजते रहे ?

अल-हिज्र (Al-Hijr):12 - इसी तरह हम गुनहगारों के दिलों में इसे उतारते है

यह भी अजीब जबरदस्ती है साहब जब गुनहगार आपसे सुबूत मांग रहे हैं तो आप जबरदस्ती पर उतर आये इस तरह वे कैसे मानेंगे ?

अल-हिज्र (Al-Hijr):13 - वे इसे मानेंगे नहीं पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं

अल-हिज्र (Al-Hijr):14 - यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,

अल-हिज्र (Al-Hijr):15 - फिर भी वे नही मानेंगे.

अरे साहब ऐसा तो किसी ने नही कहा और आपने तो अब तक ऐसा कोई सुबूत दिया ही नही आप आसमान में द्वार मत खोलिए बस आसमान से एक मामूली सा फरिश्ता ही उतार दीजिये लोग यही तो कह रहे हैं.

अल-हिज्र (Al-Hijr):7 - यदि तुम सच्चे हो तो हमारे सामने फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?" इसमे क्या गलत है ? उतारिये फरिश्तों की फौज और दिखा दीजिये 

लेकिन यहाँ फिर एक जुमला
अल-हिज्र (Al-Hijr):8 - फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है

तो यहां क्या झूठ का प्रयोजन चल रहा है ? लोग सच के प्रयोजन के लिए ही तो तुमसे फरिश्ते उतारने की बात कर रहे हैं न !! फरिश्ते कम पड़ गये क्या ?

अल-हिज्र (Al-Hijr):21 - कोई भी चीज़ ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक निश्चिंत मात्रा के साथ उतारते है

चाचा एक अदद फरिश्ता तो उतारा नही गया आपसे और बस जुमलेबाजी करते जा रहे हैं इसीलिए तो लोग आपके इस जुमलेबाजी का इनकार कर रहे हैं.

अल-अंबिया (Al-'Anbya'):30 - जिन्होंने इनकार किया, क्या उन्होंने देखा नहीं कि ये आकाश और धरती बन्द थे फिर हमने उन्हें खोल दिया 

आकाश और धरती डिब्बे में बन्द थे जिसे आपने खोल दिया और जब आपने ऐसा किया तब क्या इनकार करने वाले वहां मौजूद थे जो वो आपका यह जादू देख पाते ?

चाचा मानें कैसे ? सुबूत तो दीजिये पहले.

अन-नह्ल (An-Nahl):79 - क्या उन्होंने पक्षियों को आकाश में उड़ते नहीं देखा? उन्हें तो बस अल्लाह ही थामें हुए होता है निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए कितनी ही निशानियाँ है जो ईमान लाएँ.

भक्त लोगों के लिए तो ठीक है लेकिन जो भक्त नही हैं उन्हें तो आकाश में उड़ते पक्षियों में नेचर की निशानी मिलती है यहां आपका क्या रोल है इसी बात का तो सुबूत मांगा जा रहा है आपसे.

अल-इस्र (Al-'Isra'):44 - सातों आकाश और धरती और जो कोई भी उनमें है सब उसकी महिमागान करते है और ऐसी कोई चीज़ नहीं जो उसका गुणगान न करती हो किन्तु तुम उनके महिमागान को समझते नहीं.

नेचर में कहीं कोई किसी का महिमागान नही करता सिवा तुम्हारे भक्तों के अगर हम भी तुम्हारा गुणगान करें तो इसके लिए हमे सात आसमान की गप्पबाजी छोड़ कर सुबूत दीजिये.

अल-इस्र (Al-'Isra'):68 - क्या तुम इससे निश्चिन्त हो कि वह कभी थल की ओर ले जाकर तुम्हें धँसा दे या तुमपर पथराव करनेवाली आँधी भेज दे; फिर अपना कोई रहनुमा न पाओ?

एक बार फिर से प्रमाण देने की बजाए धमकी और डर दिया जा रहा है.

अल-कहफ़ (Al-Kahf):47 - जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगे और तुम धरती को बिलकुल नग्न देखोगे और हम उन्हें इकट्ठा करेंगे तो उनमें से किसी एक को भी न छोड़ेंगे

पहाड़ों को चला कर ही दिखा दिया होता लेकिन यहां भी अल्लाह ने सिवा जुमलेबाजी के ऐसा कुछ नही किया.

जुमलेबाजी पर यकीन नही करने वाले लोगों को बस दलील की जरूरत है जिससे उन्हें यकीन हो जाए इसमे वो कहाँ गलत हो गये ?

3 अल-ए-इमरान ('Ali `Imran):183 - "हम किसी रसूल पर विश्वाश नही करेंगे, जबतक कि वह हमारे सामने कोई ठोस दलील न पेश.

यहां लोगों ने क्या गलत कहा सिर्फ सबूत ही तो मांग रहे हैं न लेकिन हर बार उन्हें जुमलेबाजी के सिवा कुछ नही मिला

 "तुम्हारे पास मुझसे पहले कितने ही रसूल खुली निशानियाँ लेकर आ चुके है, और वे वह चीज़ भी लाए थे जिसके लिए तुम कह रहे हो फिर यदि तुम सच्चे हो तो तुमने उन्हें क़त्ल क्यों किया?"

अरे चाचा आप लोगों को समझाने के लिए इतने कमजोर और कामचोर रसूलों को भेजते ही क्यों थे की साधारण लोग ही उन्हें कत्ल कर देते थे यह तो आपकी नाकामी हुई न ? और आपकी इसी जुमलेबाजी की वजह से ही तो लोग उन्हें कत्ल करते थे क्योंकि आपके रसूलों के दावे बड़े बड़े होते थे लेकिन उन दावों को साबित करने के लिए सुबूत के नाम पर उनके पास जुमलेबाजी के सिवा और कुछ नही होता था. लोगों की आपसे बस इतनी ही डिमांड तो है की आप आसमान से फरिश्ता नही उतार सकते तो कम से कम उनके लिए किताब ही उतार दीजिये.

4अन-निसा (An-Nisa'):153 - लोग माँग करते है कि तुम उनपर आकाश से कोई किताब उतार लाओ, तो वे तो मूसा से इससे भी बड़ी माँग कर चुके है। उन्होंने कहा था, "हमें अल्लाह को प्रत्यक्ष दिखा दो," तो उनके इस अपराध पर बिजली की कड़क ने उन्हें आ दबोचा.

अल्लाह खुद ही बड़े बड़े दावे और बड़ी बड़ी धमकियां दे रहा है ताकि लोग इस गप्पबाजी पर यकीन कर लें की वही इस कायनात को बनाने वाला अल्लाह है लेकिन अभी तक वह गप्पबाजी के अलावा कोई भी ऐसा ठोस सबूत देने में नाकामयाब है जिससे लोग उसे सच मान लें जुमलेबाज लोगों की सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है की वह वर्तमान की समस्यायों का जवाब देने की बजाए लोगों को इतिहास में ले जाते हैं. यहां अल्लाह भी यही कर रहा है लोगों को आसमान से किताब उतार कर दिखा देता बात ही खत्म हो जाती लेकिन वह मुद्दे को मूसा के खेतों में ले गया.

अल-हज़ (Al-Haj):65 - क्या तुमने देखा नहीं कि धरती में जो कुछ भी है उसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए वशीभूत कर रखा है और नौका को भी कि उसके आदेश से दरिया में चलती है, और उसने आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है उसकी अनुज्ञा हो तो बात दूसरी है। निस्संदेह अल्लाह लोगों के हक़ में बड़ा करुणाशील, दयावान है

यहां अल्लाह अपनी शेखी बघारते हुए इतना आगे चला गया की एस्ट्रोनोमी को समझने वाले लोग गश खाकर गिर जाएं अरे चाचा आसमान आपकी शादी का शामियाना नही है जिसे आपने जमीन पर गिरने से रोक रखा है इस बात से न तो तुम करुणाशील साबित होते और न ही दयावान बल्कि अव्वल दर्जे के जुमलेबाज साबित होते हो.

कुरान का 90 प्रतिशत हिस्सा बस यही है जिसमे अल्लाह न मानने वालों को इस तरह की तमाम जुमलेबाजी के जरिये गुमराह करने की कोशिश करता है आश्चर्यजनक बात यह है आज साइंस के इस दौर में भी पढ़े लिखे भक्त इन बातों को सच मानते हैं इक्कसवीं सदी में जीने वाले ये वो भक्त हैं जो 7वी सदी के उन अरबी लोगों से भी कम बुद्धि रखते हैं जो कुरान में अल्लाह को सीधे सीधे चैलेंज कर रहे हैं.

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