जुनैद हफीज और ईशनिंदा कानून - तर्कशील भारत

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Sunday, January 19, 2020

जुनैद हफीज और ईशनिंदा कानून

जुनैद हफीज और ईशनिंदा कानून


धर्म बहुत ही अनमोल चीज है इतनी अनमोल की उसके सामने किसी इंसानी जिंदगी की भी कोई औकात नही जी हां दोस्तों पाकिस्तान में कल ही मजहब की आलोचना करने के जुर्म में एक इंसान को मारने का फरमान जारी हुआ है इनका नाम है
जुनैद हफीज जिन्हें ब्लासफेमी के जुर्म में 13 मार्च 2013 में गिरफ्तार किया गया था तब से वो जेल में ही हैं. इसी शनिवार को जज काशिफ कय्यूम ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत हफीज को मौत की सजा सुनाई साथ ही उनपर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. साल 1990 के बाद ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान भर में करीब 75 लोगों को मारा जा चुका है.
जुनैद हफीज का केस लड़ रहे वकील राशिद रहमान को 2014 में उनके ऑफिस में घुस कर गोलियों से भून दिया गया. कुरान में सुरः बकर की आयत 6 में अल्लाह कहता है जिन लोगों ने कुफ़्र (इनकार) किया चाहे तुमने उन्हें सचेत किया हो या सचेत न किया हो, वे ईमान लाने वाले नहीं. इसी सुरः की अगली आयत में इसका कारण बताते हुए अल्लाह कहता है अल्लाह ने उनके दिलों पर और कानों पर मुहर लगा दी है जिसकी वजह से उनकी आँखों पर परदा पड़ा है.

अब सवाल यह है कि हाफिज को सजा किसलिए ? जब उसके दिल पर अल्लाह ने ही कुफ्र का ठप्पा लगा दिया था तब उसने जो भी कुफ्र किया उसमे उसका दोष क्या है ? दोषी तो अल्लाह है.

सुरः आले इमरान आयत नम्बर 39 में अल्लाह कहता है कि हम जिसे चाहे सीधे मार्ग पर ले आएं और जिसे चाहे मार्ग से भटका दें. अगर कुरान को आसमानी किताब मानते हो तो इस आयत के हिसाब से जुनैद हफीज को अल्लाह ने ही भटकाया तो तुम कौन हो उसे सजा देने वाले ? एक तरफ तो तुम ही कहते हो कि धरती पर किये गए हर सही गलत का फैसला आख़िरत के दिन तुम्हारा बॉस अल्लाह करेगा फिर उसी आख़िरत और हिसाब किताब वाले कॉन्सेप्ट की धज्जियां उड़ाते हुए धरती पर इंसानों का कत्ल करते हो क्यों ?

असल मे जिसे तुम अपना मजहब कहते हो वो और कुछ नही तुम्हारी हरामखोरी और तुम्हारे दोगले पन को ढंकने का जरिया मात्र है बस. ब्लासफेमी जैसे कानून की आड़ में तुम ज्यादा दिनों तक इस मक्कारी को छुपा नही सकते बदलाव की हवाएं बहुत तेज हैं जिस दिन ये हवाएं आंधियों का रूप लेंगी उस दिन तुम्हारे इस हवाई फलसफे को भी साथ उड़ा ले जाएगी तब न कोई आसमानी किताब नजर आएगी और न तुम्हारा अल्लाह जिसके नाम पर आज तुम बेगुनाहों की हत्याएं कर रहे हैं.
कोई भी साधारण बुद्धि रखने वाला आदमी भी कुरान पढ़कर उसमे छुपी इंसानी मक्कारी को समझ सकता है और झूठ की बुनियाद पर टिकी इस वाहियात फिलॉसफी की धज्जियां उड़ा सकता है इसलिए ब्लासफेमी जैसे कानून के जरिये कुरान इस्लाम मुहम्मद और अल्लाह को बचाने की नाजायज कोशिश की जाती है ताकि धर्म का धंधा चलता रहे और इस धंधे की आड़ में मुल्ला मौलवी और उलेमाओं की फौज हरामखोरी करते रहे. जुनैद हफीज ने सवाल ही तो खड़े किए थे ? तुम सच्चे हो तो इसमे इतना डरने की जरूरत क्या थी ?

अगर जुनैद ने तुम्हारे नबी को गाली भी दी थी तब भी उसे मौत की सजा क्यों ? तुम ही अपने नबी को वो झूठी हदीस चिल्ला चिल्ला कर कहते हो न कि एक औरत थी जो नबी पर रोज कूड़ा फेंकती थी वगैरह वगैरह.....अल्लाह को रहम करने वाला कहते हो और उसी अल्लाह के नाम पर बेरहमी से बेगुनाहों का कत्ल करते हो यही तुम्हारा दोगलापन एक दिन तुम्हे ले डूबेगा..यह मत भूलो की तुम्हारे पैगम्बर ने भी मक्का की पुरानी मान्यताओं पर सवाल खड़े किए थे इतने बेगैरत न हो जाओ की दुनिया को तुम्हारे मुंह पर थूकने में भी शर्म आये. यह भी याद रखो की तुम्हारे पूरे हवाई निजाम की बुनियाद जिस नबी की बातों पर टिकी हैं उस मुहम्मद की सारी दलीलें आज भी शक के दायरे में हैं
अल्लाह के नबी अपनी पूरी जिंदगी में नबूवत का एक भी जायज सबूत नही दे पाए थे लोगों ने मान लिया और आगे भी आंखें मूंदे मानते चले गए भीड़ को देख कर भीड़ बढ़ी और जाहिलों की यही भीड़ आगे चलकर मुसलमान कहलाई. जिस तरह नबूवत का दावा झूठा था ठीक वैसे ही ये तुम्हारी आसमानी किताब "फेक न्यूज़" का ढेर ही साबित हुई जाकिर नाइक जैसे कितने भी लोग फर्जी डिग्रियों के हवाले से कुरान की चपटी धरती को शुतुरमुर्ग का अंडा साबित करें कुरान से विज्ञान नही निकाल पाएंगे साइंस को आगे बढ़ने के लिए कभी किसी धर्मग्रंथ के मार्गदर्शन की कोई जरूरत नही पड़ी लेकिन आज सभी धार्मिक गिरोहों को विज्ञान की जरूरत ही क्यों पड़ी ? क्योंकि वे भी जानते हैं कि आज साइंस के बिना कुरान का एक हर्फ भी मुकम्मल नही.

फेक न्यूज़ पर आधारित आज जितने भी धर्म दुनिया मे हैं उन सबका अंत निश्चित है क्योंकि यह साइंस का दौर है सवालों का युग है आज का बच्चा भी तभी होनहार माना जाता है जब वह सवाल करना शुरू करता है इन सवालों को ब्लासफेमी की आड़ में ज्यादा दिनों तक छुपाना मुश्किल है तुम्हे अंदाज भी नही है की तुम्हारे कदमों के नीचे की जमीन बहुत तेजी से खिसक रही है कुरान की आयतें नंगी हो चुकी हैं ग्रंथों के श्लोक अब अपनी पवित्रता और प्रासंगिकता दोनों खो चुके हैं दुनिया को नही चाहिए कोई भी धर्म और न ही दुनिया को आज किसी आसमानी किताब की जरूरत है.

तेरा मजहब खून से रंगा है इसलिए आज सूली पर जुनैद टँगा है धर्म की बुनियाद में लाशों का ढेर है मजहब की आड़ में यहां हर भेड़िया शेर है कब तक मारोगे ? कितनों को कत्ल करोगे ? याद रखो वो दिन भी आएगा जब ज़ुल्मतों का यह दौर काला इतिहास बन जायेगा तब मजहब के नाम पर कोई विकार न होगा कोई मुल्हिद ब्लासफेमी का शिकार नही होगा और तब तेरे खुदा को सजायेमौत दी जाएगी और सूली पर जुनैद नही इस्लाम टँगा होगा तेरा मजहब खून से रंगा है इसलिए आज सूली पर जुनैद टँगा है.

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